
जब भी हिन्दू धर्म में कोई व्रत या त्योहार होता है हम उस दिन कुछ कर्म करते है जिससे हमारी आध्यात्मिक प्रगति हो सके और हमारी सात्त्विकता में वृद्धि के कारण समाज की समूहिक सात्त्विकता बढ़ सके !
मात्र राष्ट्रीय त्योहार के दिन हम सब अकर्मण्य अपने अपने घर में मनोरंजन का कोई साधन ढूंढ विश्राम लेते हैं। होना यह चाहिए की विकासशील भारत में इस दिन सभी भारतियों ने निःशुल्क श्रमदान कर राष्ट्रप्रेम और समाज कल्याण की भावना का आदर्श रखना चाहिये ! परंतु आज राष्ट्रिय त्योहार को छुट्टी घोषित कर हमारे नेता भारतीयोंमें अकर्मण्यता की सीख परोसती है !-तनुजा ठाकुर
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