जुलाई १४, २०१८
देशमें मतदान आते ही ‘हिन्दुत्व’की कार्यसूची (एजेण्डा) बलशाली होने लगती है । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तो पहले से ही हिन्दुत्वका ध्वज लिए खडे हैं और अब इस श्रृंखलामें कांग्रेस और सीपीएम भी आ गए हैं । केरलमें कुछ ऐसा ही देखनेको मिल रहा है । केरलकी राजनीति भी अब ‘राम और रामायण’के आश्रय चलने लगी है । राज्यके दो प्रमुख राजनीतिक दल सीपीएम और कांग्रेस ‘राम’के आश्रय एक दूसरेको पराजित करनेमें लगे हुए हैं । इस कार्यक्रमका एक प्रमुख लक्ष्य ये भी है कि कैसे भाजपा और आरएसएसके बढते प्रभावको रोका जाए ?
बता दें कि केरलमें १७ जुलाईसे ‘रामायण मास’का आयोजन किया जा रहा है । इस मध्य राज्यके अधिकतर हिन्दू घरोंमें प्रतिदिन महाकाव्यका पाठ होता है । हिन्दुओंका ऐसा मानना है कि मानसूनके साथ आने वाले रोग और अन्य समस्याओंसे ये उनकी रक्षा करता है । सीपीएमने हिन्दू मतोंपर और अधिक पकड बनानेके लिए उपदेशोंका आयोजन किया है, ताकि भगवान रामको जनताके समक्ष लाया जा सके । वहीं, कांग्रेसने भी अपने ‘विचार विभाग’केद्वारा रामायणसे सम्बन्धित कार्यक्रमकी योजना बनाई है ।
‘रामायण मास’के प्रथम दिवस अर्थात १७ जुलाईको कांग्रेस नेता शशि थरूर तिरुवनन्तपुरमसे उद्घाटन सम्बोधन देंगे । कांग्रेसके ‘विचार विभाग’के अध्यक्षका कहना है कि ये प्रथम बार है कि कांग्रेस ‘रामायण मास’में रामायणसे सम्बन्धित कार्यक्रम कर रही है । उन्होंने कहा कि महात्मा गांधीने जिस राम राज्यका स्वप्न देखा था, उसे पूरा करनेका प्रयास किया जाएगा और इसे व्यापक रूपसे लोगोंके समक्ष लाया जाएगा !
सीपीएम ‘रामायण मास’के मध्य होने वाले कार्यक्रमोंमें सीपीएम ‘संस्कृत संघ’के माध्यमसे जुडेगी । केरलके सभी १४ प्रान्तोंमें संस्कृत संघकी समितियां हैं और इन समितियोंके अधिकतर सदस्य सीपीएमके हैं । एक ओर तो सीपीएम इन कार्यक्रमोंके द्वारा कांग्रेसको पछाडनेमें लगी है तो वहीं दूसरी ओर इसका लक्ष्य भाजपा और आरएसएसके वृहद होते प्रभावको भी रोकना है ।
स्रोत : अमर उजाला
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