अगस्त १, २०१८
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणने (यूआईडीएआई) मंगलवारको लोगोंको चेतावनी दी कि वे अपना १२ अंकोंकी आधार संख्या जालस्थल (इण्टरनेट) व सामाजिक प्रसार माध्यमपर (सोशल मीडियापर) साझा नहीं करें ! प्राधिकरणकी यह चेतावनी ‘ट्राई’ अध्यक्षकी ओरसे आधार संख्या ‘ट्विटर’पर साझा कर ‘हैकरों’को चुनौती देनेके पश्चात आई है ।
‘यूआईडीआई’की ओरसे दिए वक्तव्यमें कहा गया कि इस प्रकारकी गतिविधि अनावश्यक है और इससे दूर रहना चाहिए; क्योंकि वैधानिक रूपसे ठीक नहीं है; इसलिए लोग सार्वजनिक रूप से आधार संख्या जालस्थलपर साझा कर दूसरोंको चुनौती देनेकी प्रवृत्तिसे बचे ! वक्तव्यमें चेतावनी दी गई कि किसी औरके आधार संख्यासे आधार प्रमाणित कराना या किसी अन्य कारणोंसे दूसरेका आधार संख्या प्रयोग करना ‘आधार कानून’ और भारतीय दण्ड संहिताके अन्तर्गत अवैधानिक है । यदि कोई इस कृत्यमें सम्मिलित हुआ पाया जाता है या इस प्रकारकी गतिविधिको प्रोत्साहित करता है, तो उसपर वैधानिक कार्यवाहीकी जा सकती है; इसलिए लोग इस प्रकारकी गतिविधिसे दूर रहें ! आधार विशिष्ट पहचान है और इसका प्रयोग विभिन्न सेवाएं, लाभ और अनुदान लेनेके लिए व्यक्तिकी पहचान स्थापित करनेके लिए की जा जाती है । ‘यूआईडीएआई’ नियमित रूपसे लोगोंको आधार संख्या प्रदर्शित करने, प्रकाशित करने या सार्वजनिक रूपसे साझा नहीं करनेके लिए जागरूक करता है ।
प्राधिकरणने कहा कि १२ अंकोंका आधार नम्बर व्यक्तिगत और संवेदनशील सूचना है, जैसे बैंक खाता संख्या, पासपोर्ट संख्या, पैन क्रमांक; इसलिए इसे तभी साझा किया जाए, जब वैधानिक रूपसे यह आवश्यक हो । ‘आईटी’ नियमोंके अन्तर्गत संवेदनशील सूचनाओंके प्रकाशन और सार्वजनिक रूपसे साझा करनेपर प्रतिबन्ध है ।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरणके (ट्राई) अध्यक्ष आर एस शर्माने शनिवारको ‘ट्विटर’पर अपना आधार संख्या साझा किया था । साथ ही ‘हैकरों’को चुनौती दी थी कि वे इसमें सूचनाको ‘हैक’ कर निकालें और उसका दुरुपयोग करके दिखाएं ! इसके पश्चात कुछने दावा किया कि उन्होंने शर्माके बैंक खाते, ‘ईमेल’की सूचना प्राप्त कर ली है । यद्यपि शर्माने सूचना उद्घाटित होने से इनकार किया था।
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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