अगस्त २, २०१८
वर्ष २०१३ में पाकिस्तानसे भागकर हिन्दुस्तान पहुंचे ६२० हिन्दू शरणार्थियोंकी मुश्किलें निरन्तर बढती जा रही हैं । लगभग दो माहसे बिना बिजलीके रह रहे इन लोगोंकी परेशानी वर्षाके कारण और अधिक बढ गई है । हर स्थानपर विनती करनेके पश्चात भी कोई सहायता नहीं मिली ।
स्थिति यह है कि जहांगीर पुरीके मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशनके पीछे सेनाकी भूमिपर ये शरणार्थी जर्जर परिस्थितियोंमें रहनेको विवश हैं । इनके शिविरोंके निकट नाले बन गए हैं और गहरे स्थानोंपर जल भराव हो गया है, जिनमें मच्छरोंके पनपनकी गति तीव्र हो गई है । इससे इन शरणार्थियोंमें डेंगू-मलेरिया जैसे रोगों फैलनेका संकट बढ गया है ।
गत दिवस बिजली विभागके कर्मचारियोंने इनके शिविरोंसे बिजलीका संचार हटा दिया था । दो माहके पश्चात भी आज तक इन शिविरोंमें बिजलीकी सुविधा आरम्भ नहीं करवाई जा सकी ! गर्मीमें कडी धूप और वर्षाकी घुटनके मध्य ये लोग बहुत विकट स्थितियोंमें जी रहे हैं ।
कुल ६२० हिन्दू शरणार्थियोंमें १६० बच्चे और २४० महिलाएं हैं । सभी २२० पुरुष स्थानीय विपणिमें श्रमिकोंके रुपमें कार्य कर रहे हैं । कुछ लोग रेहडी लगाते हैं या कोई छोटे-मोटे सामान बनाकर लोगोंको विक्रय करते हैं और उससे हुई आयसे पेट भर रहे हैं । इन शरणार्थियोंकी सहायता कर रहे एक समाजसेवी हरिओमने बताया कि कुछ लोगोंके सहयोगसे यहां एक छोटा सा विद्यालय खुलवा दिया गया है, जहां इनके बच्चोंको प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है; लेकिन इसके लिए उन्हें किसी प्रकारका कोई शासकीय सहयोग नहीं मिल रहा है । हरिओमने बताया कि कुछ दूरीपर आंगनवाडी जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं; लेकिन इन बच्चोंके लिए प्रयास करनेके पश्चात भी वे आंगनवाडी खुलवानेमें सफल नहीं हो सके ।
उन्होंने बताया कि इन लोगोंकी सहायताके लिए उन्होंने कई लोगोंसे सम्पर्क किया; लेकिन कहींसे कोई सहायता नहीं मिली । वे इनकी समस्याओंको लेकर केन्द्रीय मन्त्री हर्षवर्धन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारीसे लेकर दिल्ली शासनतक में प्रत्येक स्थानपर विनती की; लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला ! भाजपासे स्थानीय पार्षद गरिमा गुप्ता और आम आदमी पार्टीसे विधायक पवन कुमार शर्मासे भी सहायताके नामपर उन्हें आश्वासनके अतिरिक्त और कुछ नहीं मिला है ।
हरिओमने बताया कि इन हिन्दू शरणार्थियोंको यहां रहते लगभग पांच वर्षका समय बीत चुका है; लेकिन एक भी शरणार्थीके विरुद्ध एक भी ‘एफआईआर’ तक नहीं है ! अर्थात ये शान्तिप्रिय लोग हैं, जो किसी प्रकारसे अपना गुजारा कर रहे हैं । वहीं इनके शिविरोंसे कुछ ही दूरीपर बसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थी दिल्लीकी सुरक्षाके लिए संकट बने रहते हैं । समय-समयपर उनके विरुद्ध कई अभियोग प्रविष्ट हुए हैं, जबकि हिन्दू शरणार्थियोंके विरुद्ध कहीं कोई परिवाद प्रविष्ट नहीं कराई गई है ।
क्यों पहुंचे थे हिन्दु्स्तान
पाकिस्तानी हिन्दुओंके इस पलायनके पीछे जो वेदना छिपी हुई है, उसे सरलता से नहीं समझा जा सकता है । शरणार्थियोंने बताया कि पाकिस्तानमें उन्हें केवल हिन्दू होनेके कारण उनका ऐसा शोषण किया जाता है जिसे बताया नहीं जा सकता । इनके अन्दर छिपा भय इसी बात से समझा जा सकता है कि भारतमें होनेके बाद भी वे खुलकर कुछ बतानेको तैयार नहीं हैं ! एक शरणार्थीने नाम न बताए जानेके वचनपर अमर उजालाको बताया कि एक-एक कर उनकी दो बेटियोंको दिन दहाडे उठा लिया गया । उनका धर्म परिवर्तन कर किसी मुसलमानसे विवाह कर दिया ! आज वे नहीं जानतीं कि उनकी बेटियां कहां और किस स्थितिमें हैं ? इन अपमान भरी परिस्थितियोंसे बचनेके लिए उन लोगोंने पाकिस्तानसे भागना ही ठीक समझा ।
एक हिन्दू शरणार्थीने बताया कि विरोध करनेपर उन्हें पुलिस उठा ले जाती थी, बिना किसी चूकके भी उनपर कोई झूठा अभियोग बनाकर एक-एक वर्ष तक कारावासमें भर दिया जाता था !
शरणार्थीने बताया कि उन्हें नूतन शासन बननेपर भी किसी वस्तुकी कोई आशा नहीं है । इसका कारण है कि उनपर जो अत्याचार होते हैं, वह स्थानीय लोगों और स्थानीय पुलिसके सहयोगसे होते हैं । शासन तो सीधे रूपसे उन्हें कुछ नहीं कहती; लेकिन उनके साथ शोषण करने वालोंके विरुद्ध कोई पग भी नहीं उठाती ! यही कारण है कि पाकिस्तानमें अल्पसंख्यक नष्ट होनेकी सीमापर हैं । उन्होंने कहा कि पाकिस्तानमें स्थिति ठीक होनेतक वे वापस नहीं जाना चाहते ।
स्रोत : अमर उजाला
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