अगस्त १०, २०१८
नौवीं अनुसूचीमें सम्मिलित न किए जानेके दु:खके साथ समूचे विपक्षने अनुसूचित जाति एवं जनजाति संशोधन विधेयकको राज्यसभामें भी पारित करनेमें शासनका साथ दिया । यह विधेयक लोकसभामें पहले ही पारित किया जा चुका है । इसके साथ ही उच्चतम न्यायालयके इस विधानके अन्तर्गत तत्काल बन्दी बनानेके प्रावधान लगा प्रतिबन्ध भी समाप्त हो गया । विधेयकपर चर्चाके मध्य सभी विपक्षी दलोंने समर्थन करते हुए इसे नौंवी अनुसूचीमें न लानेपर शासनके विरूद्ध अपना क्रोध निकाला ।
उच्चतम न्यायालयने इसी वर्ष मईमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति विधानके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट होने पर तत्काल बन्दी बनाने जैसे कडे प्रावधानको समाप्त कर दिया था । न्यायालयने माना था कि इसका अनुचित प्रयोग हो रहा है, जिसपर प्रतिबन्ध लगना चाहिए । शीर्ष न्यायालयके इस निर्णयके पश्चात दलित संगठनोंने देशव्यापी आन्दोलन आरम्भ कर इसे राजनीतिक रंग दे दिया था ।
विपक्षी दल भी न्यायालयके बहाने शासनपर बरस रहे थे, जबकि शासनने अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी थी कि वह विधानमें कोई ढील नहीं होने देगी । इसीके अन्तर्गत मन्त्रिमण्डलकी स्वीकृतिके पश्चात विधेयक संसदमें प्रस्तुत कर पारित करा लिया गया ।
विधेयकपर चर्चाका उत्तर देते हुए सामाजिक अधिकारिता मन्त्री थावर चन्द गहलोतने कहा कि मोदी शासन गरीबों, पिछडोंके हितोंके लिए हमेशा के लिए प्रतिबद्ध है ! उन्होंने कहा कि हमारे समाजके पिछडे वर्गके प्रति जो प्रतिबद्धता है, वह किसीके दवाबमें नहीं आई है । उन्होंने सभी सांसदोंसे विधेयकका समर्थन कर विधानको और शक्तिशाली बनानेका आग्रह किया ।
इससे पूर्व चर्चामें भाग लेते हुए कांग्रेसकी नेता कुमारी सैलजाने शासनकी मंशापर प्रश्न किया । उन्होंने कहा कि शासनकी इच्छा होती तो इसे नौंवी अनुसूचीमें डालती, जिससे न्यायालय इसमें कुछ नहीं कर पातीं । नौंवी अनुसूचीमें न होनेके कारण इसे बार-बार न्यायालयमें चुनौती दी जाएगी । भाजपाके किरोडीलाल मीणाने कांग्रेसपर क्रोध करते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति विरोधी बताया । उन्होंने कुछ राज्योंका नाम लेते हुए वहांकी दलित विरोधी गतिविधियोंका ब्यौरा दिया । इसके पश्चात सदनमें हंगामा आरम्भ हो गया, जिससे सदनको अल्पकालके लिए स्थगित करना पडा ।
शिवसेनाके नेता संजय राउतने कहा ‘मैं डॉ अम्बेडकर, बाबा फुलेके प्रदेशसे आता हूं । हमारा दल शिवसेनासे अधिक सामाजिक न्याय व समताके बारेमें शायद ही कोई और जानता होगा ।’ उन्होंने कहा कि इस विधेयकको लेकर आज भी महाराष्ट्र बन्द है । पासवानके उस वक्तव्यपर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने शिवसेनाको दलित विरोधी बताया था । इसके पश्चात राज्यसभामें भी एससी, एसटी संशोधन विधेयक पास हो गया है ।
स्रोत : दैनिक जागरण
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