पूर्वकालमें वासनान्ध पुरुष वैश्यालयमें रात्रिके समय जिन तामसिक गीतोंको सुननेके लिए मुंह छुपाकर जाते थे, आज उसे सब अपनी बहू-बेटियोंके साथ अपने घरमें निर्लज्ज होकर देखते हैं और उसे हमने ‘आइटम सॉन्ग’का नाम दिया है । यदि इसे ही आधुनिकता कहते हैं, तो धिक्कार है ऐसी निर्लज्ज आधुनिकताको !
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