सितम्बर २८, २०१८
उच्च न्यायालयने सभी जालस्थल सेवा प्रदाताओंको अश्लीलता फैला रही अश्लील जालस्थलको (साइट्स) बंद करनेके आदेश दिए हैं । न्यायालयने केन्द्रकी २०१५ की अधिसूचनाका पालन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक माध्यममें किसी भी रूपमें प्रचारित होने वाली अश्लील सामग्री, अश्लीलताके प्रसारको तत्काल प्रभावसे प्रतिबन्धित करनेका आदेश दिया है ।
न्यायालयने केन्द्र शासनसे पूछा है कि इस सम्बन्धमें जारी अधिसूचनाका चलभाष उद्योगोंने अनुपालन किया या नहीं ? न्यायालयने सरकारको ११ अक्टूबरतक उत्तर देनेका निर्देश दिया और कहा कि ‘आईएसपी’ अनुमतिपत्र (लाइसेंस) धारक यदि आदेशका पालन नहीं करते हैं तो केन्द्र सरकार उनके अनुमतिपत्र निरस्त करे !
न्यायालयके समक्ष यह तथ्य भी आया कि देहरादूनके भाऊवालामें किशोरके साथ सामूहिक दुष्कर्मके प्रकरणमें आरोपियोंने अश्लील देखना स्वीकार किया है । न्यायमित्र अधिवक्ता अरविन्द वशिष्ठने न्यायालयको बताया कि इन अश्लील जालस्थलके (साइट्स) सर्वर विदेशोंमें हैं, लेकिन बीएसएनएल, एमटीएनएल व अन्य इनकी सेवा प्रदाता हैं । केन्द्र शासनने २०१५ में अधिसूचना जारी कर उद्योगोंसे ‘आईटी अधिनियम’के अन्तर्गत इन जालस्थलको (साइट्स) बंद करनेको कहा था । परन्तु जालस्थलको (साइट्स) बन्द नहीं किया है ! कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारीकी खण्डपीठने बृहस्पतिवारको सुनवाई करते हुए सभी जालस्थल सेवा प्रदाता अनुमतिपत्र धारकोंको ३१ जुलाई २०१५ की केन्द्रकी अधिसूचनाका पालन करने और अश्लील जालस्थल (साइट्स) बन्द करनेका आदेश जारी किया ।
न्यायालयने कहा कि २०१५ की अधिसूचना पर्याप्त न हो तो ‘आईटी एक्ट २०००’का आश्रय लिया जाए ! न्यायालयने कहा कि यदि जालस्थल सेवा लाइसेंस धारक ३१ जुलाई २०१५ की अधिसूचनाका पालन नहीं करते हैं तो शासन उनका लाइसेंस निरस्त करे !
“न्यायालयके इस आदेशका हम सहृदय समर्थन करते हैं । सोची-समझी रणनीति अन्तर्गत भारतीय युवाओंको इस जालमें फंसाया गया, ताकि उन्हें भी पश्चिम समान धर्महीन, ओजहीन, संस्कारहीन नपुसंक बनाया जा सके और आश्चर्य है इसे भारतीय सरकारें अभी तक बाधित नहीं कर पाई हैं ! अब केन्द्र शासन टेलीकॉम उद्योगोंपर कार्यवाही करें और इसे बन्द कराएं, यही राष्ट्रके हितमें है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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