उत्तराखण्ड न्यायालयने ८५९ अश्लील जालस्थलको प्रतिबन्धित करनेका दिया आदेश, न माननेपर कार्यवाही करें शासन


सितम्बर २८, २०१८

उच्च न्यायालयने सभी जालस्थल सेवा प्रदाताओंको अश्लीलता फैला रही अश्लील जालस्थलको (साइट्स) बंद करनेके आदेश दिए हैं । न्यायालयने केन्द्रकी २०१५ की अधिसूचनाका पालन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक माध्यममें किसी भी रूपमें प्रचारित होने वाली अश्लील सामग्री, अश्लीलताके प्रसारको तत्काल प्रभावसे प्रतिबन्धित करनेका आदेश दिया है ।

न्यायालयने केन्द्र शासनसे पूछा है कि इस सम्बन्धमें जारी अधिसूचनाका चलभाष उद्योगोंने अनुपालन किया या नहीं  ? न्यायालयने सरकारको ११ अक्टूबरतक उत्तर देनेका निर्देश दिया और कहा कि ‘आईएसपी’ अनुमतिपत्र (लाइसेंस) धारक यदि आदेशका पालन नहीं करते हैं तो केन्द्र सरकार उनके अनुमतिपत्र निरस्त करे !

न्यायालयके समक्ष यह तथ्य भी आया कि देहरादूनके भाऊवालामें किशोरके साथ सामूहिक दुष्कर्मके प्रकरणमें आरोपियोंने अश्लील देखना स्वीकार किया है । न्यायमित्र अधिवक्ता अरविन्द वशिष्ठने न्यायालयको बताया कि इन अश्लील जालस्थलके (साइट्स) सर्वर विदेशोंमें हैं, लेकिन बीएसएनएल, एमटीएनएल व अन्य इनकी सेवा प्रदाता हैं । केन्द्र शासनने २०१५ में अधिसूचना जारी कर उद्योगोंसे ‘आईटी अधिनियम’के अन्तर्गत इन जालस्थलको (साइट्स) बंद करनेको कहा था । परन्तु जालस्थलको (साइट्स) बन्द नहीं किया है ! कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारीकी खण्डपीठने बृहस्पतिवारको सुनवाई करते हुए सभी जालस्थल सेवा प्रदाता अनुमतिपत्र धारकोंको ३१ जुलाई २०१५ की केन्द्रकी अधिसूचनाका पालन करने और अश्लील जालस्थल (साइट्स) बन्द करनेका आदेश जारी किया ।

न्यायालयने कहा कि २०१५ की अधिसूचना पर्याप्त न हो तो ‘आईटी एक्ट २०००’का आश्रय लिया जाए ! न्यायालयने कहा कि यदि जालस्थल सेवा लाइसेंस धारक ३१ जुलाई २०१५ की अधिसूचनाका पालन नहीं करते हैं तो शासन उनका लाइसेंस निरस्त करे !

 

“न्यायालयके इस आदेशका हम सहृदय समर्थन करते हैं । सोची-समझी रणनीति अन्तर्गत भारतीय युवाओंको इस जालमें फंसाया गया, ताकि उन्हें भी पश्चिम समान धर्महीन, ओजहीन, संस्कारहीन नपुसंक बनाया जा सके और आश्चर्य है इसे भारतीय सरकारें अभी तक बाधित नहीं कर पाई हैं ! अब केन्द्र शासन टेलीकॉम उद्योगोंपर कार्यवाही करें और इसे बन्द कराएं, यही राष्ट्रके हितमें है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।
© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution