व्यक्तिगत ग्रहोंके माध्यमसे व्यक्तिका कालमहात्म्य ज्ञात होता है, तो मेदनीय ज्योतिष तथा संख्याशास्त्र आदिसे समष्टिका कालमाहात्म्य ज्ञात होता है, उदा. भारतका भविष्य देखने हेतु देशका नाम, यह कब स्वतन्त्र हुआ, वह कुण्डली; किसी संस्थाका भविष्य देखने हेतु संस्थाकी स्थापना होनेके समयकी कुण्डली, संस्थाका नाम, संस्था प्रमुखका नाम तथा उसकी कुण्डली; किसी कुटुम्बका भविष्य देखने हेतु कुटुम्ब प्रमुखकी कुण्डली देखी जाती है ।
इनसे ही ज्योतिषशास्त्रमें भारत अन्य देशोंसे कितना आगे है तथा ज्योतिषशास्त्रको असत्य सिद्ध करनेवाले बुद्धिप्रामाण्यवादी कितने बुद्धिहीन हैं, यह ध्यानमें आता है ।
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