अक्तूबर २४, १०१८
उच्चतम न्यायालयने देश पटाखे फोडनेका समय निर्धारित कर दिया है । उच्चतम न्यायालयने अपने निर्णयमें कहा कि ऐसे पटाखे फोडे और विक्रय किए जाएं, जो कम प्रदूषण करते हों । इसके अतिरिक्त पटाखे रात्रि ८ बजे से लेकर १० बजे तक ही फोडें ! तीन न्यायाधीशोंकी खण्डपीठने कहा कि क्रिसमस, न्यू ईयर, गुरुपर्व और विवाह जैसे अवसरपर भी कुछ देरके लिए आतिशबाजी की जा सकती है । अधिक प्रदूषण करने वाले और तीव्र ध्वनि करने वाले पटाखोंके विक्रय और फोडनेपर प्रतिबन्ध रहेगा । इसपर भाजपा सांसद चिंतामणि मालवीयने कहा कि हिन्दू पंचांगके अनुसार हमारे धर्म परम्पराओं और त्यौहारोंका पालन किया जाता है । मैं पहले पूजा करुंगा उसके पश्चात ही पटाखे फोडूंगा । हम त्यौहारोंपर समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकते हैं, ऐसे प्रतिबऩ् मुगल कालमें भी नहीं थे । यह अस्वीकार्य है ।
आपको बता दें कि पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) सुनिश्चित करेगा कि निर्धारित स्तरसे अधिक ध्वनि वाले पटाखे न विक्रय किए जाएं । ‘पेसो’ निर्धारित स्तरसे अधिक ध्वनि वाले पटाखोंके निर्माता और विक्रेताका अनुमति-पत्र (लाइसेंस) निरस्त कर सकता है । क्रिसमस और नव वर्षके अवसरपर रात्रि ११.५५ से १२.३० तक ही पटाखे फोडे जा सकते हैं । केन्द्र और राज्य सामुदायिक आतिशबाजीको बढावा देनेके ढंग खोजे ताकि अधिक प्रदूषण न हो । इसके लिए विशेष स्थान पहले से निर्धारित किए जाएं ।
उच्चतम न्यायालयने पहले कहा था कि प्रतिबन्धसे सम्बन्धित याचिकापर विचार करते समय पटाखा उत्पादकोंके आजीविकाके मौलिक अधिकार और देशके १.३ अरब लोगोंके स्वास्थ्य अधिकार सहित विभिन्न पहलुओंको ध्यानमें रखना होगा । न्यायालयने कहा कि संविधानके अनुच्छेद २१ (जीवनके अधिकार) सभी वर्गके लोगोंपर लागू होता है और पटाखोंपर देशव्यापी प्रतिबन्धपर विचार करते समय सन्तुलन बनाए रखनेकी आवश्यकता है ।
“हिन्दुओ ! रज-तम प्रधान धुुुएं व देेेवताओंंकेे चित्र वाले पटाखोंंसे त्यौहारोंमें सात्विकता नष्ट होती है और साथ ही देेवताओंकी विडम्बना कर पापके भागी होते हैं; अत: देव-पूजन, घी- तेलके दीपक व रंगोली आदिकी देवपद्धति अपनाएंं, जिससे देवकृपा प्राप्त हो !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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