किसी भी देशका कठोरसे कठोर विधान (कानून) भी वहांकी प्रजाको अधर्म करनेसे नहीं रोक सकता है; मात्र और मात्र धर्मनिष्ठ प्रजा ही अपराधसे दूर रहती है; अतः प्रजाको धर्मनिष्ठ करना, अपराधोंको न्यून करनेका सर्वाधिक स्थायी उपाय है, जो इस देशके निधर्मी शासनकर्ताओंकी तामसिक बुद्धिको आजतक समझमें नहीं आया है ।
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