नवम्बर २३, २०१८
बनारसके काशी विश्वनाथ मंदिरमें बन रहे गलियारेका (कारीडोरका) प्रकरण उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है । न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट हुई है, जिसमें तत्काल प्रभावसे चल रहे निर्माण और ध्वस्तीकरणपर प्रतिबन्ध लगाए जानेकी मांग की गई है ! यह याचिका जीतेन्द्र नाथ व्यास और अंजुमन इंतजामिया मस्जिदकी ओरसे मिल कर प्रविष्ट की गई है । याचिकापर गुरुवार, २२ नवम्बरको सुनवाई होनी थी, परन्तु सुनवाई एक सप्ताहके लिए टल गई ।
काशीमें विश्वनाथ मंदिरसे लेकर गंगा तकका एक गलियारा (कारीडोर) बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सरलतासे विश्वनाथ मंदिर तक पहुंच सकें । इसके लिए आसपासकी घनी जनसंख्याके मकानोंको क्रय कर उन्हें ढहाया जा रहा है । इसी क्रममें मंदिर परिक्षेत्रके भीतर भी कुछ काम चल रहा है ।
गुरुवारको प्रकरण न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व अशोक भूषणकी पीठमें सुनवाईके लिए लगा था, परन्तु सुनवाई एक सप्ताहके लिए टल गई । अधिवक्ता फुजैल अहमद अयूबीकेद्वारा प्रविष्ट की गई याचिकामें कहा गया है कि प्रथम याचिकाकर्ता काशी विश्वनाथ मंदिरके व्यास परिवारका सदस्य है और व्यास है । वह मंदिर और भगवानकी पूजा अर्चना करता है, जबकि दूसरा याचिकाकर्ता ज्ञानवापी मस्जिदका प्रबन्धन देखता है ।
याचिकामें आरोप लगाया गया है कि केन्द्र सरकार काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी परिसरमें दखल दे रही है । कहा गया है कि याचिकाकर्ता मिलकर वहांका प्रबन्धन देखते हैं । व्यास परिवार और मस्जिद प्रबन्धनके मध्य मतभेद होनेके पश्चात भी दोनोंके मध्य आमसहमतिका करार होता ताकि दोनों समुदायोंके मध्य शान्ति फनी रहे और दोनों साथ साथ बने रहें । इसमें राज्य सरकार मध्यस्थकी भूमिकामें रहती है, ताकि सन्धिकी शर्तोको लागू कराया जा सके और आपसी समझदारी बनी रहे । उसके अनुसार मस्जिद इंतजामियाकी ओरसे वार्षिक व्यवस्थापनके अतिरिक्त पूरे परिसरमें दोनों पक्षोंकी इच्छाके बिना कोई नूतन निर्माण नहीं कराया जा सकता ।
आरोप लगाया गया है कि काशी विश्वनाथ मंदिरके आसपास विकास और आधुनिकीकरणके नामपर केन्द्र सरकारके निर्देशपर गत कुछ माहसे जिला प्रशासन उस क्षेत्रमें किसीको घुसने नहीं देता और निरन्तर ध्वस्तीकरणका कार्य कर रहा है । इसके लिए उसने दोनों याचिकाकर्ताओंसे कोई आज्ञा नहीं ली, जो कि उस क्षेत्रका प्रबन्धन देखते हैं । आधुनिकीकरणके बहाने स्थानीय प्रशासन बिना किसी अधिकारके एक-एक करके आसपासके घर क्रय कर रहा है और फिर उन्हें ढहा रहा है । इतना ही नहीं प्रशासनने संरक्षित धरोहर मंदिरके कुछ भाग और व्यास पीठको भी ढहा दिया है ।
अभी हाल में प्रशासनने ज्ञानवापी परिसरकी प्राचीन भित्त, जो कि मस्जिदका भाग था, जहां इमाम प्रार्थना कराते थे, ढहा दी गई । यह धार्मिक सम्पत्तिमें हस्तक्षेप है । मांग है कि ढहाई गई व्यास पीठ और ज्ञानवापी परिसरकी भित्तको पुनः बनाया जाए ।
“मुसलमान आक्रान्ताओंद्वारा न केवल अयोध्या वरन् मथुरा, काशी आदिको भी अधिकृत कर वहां अवैध मस्जिदोंका निर्माण किया गया ! उसका परिणाम आज भी तथाकथित सौहार्दके रूपमें हम भोग रहे है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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