नवम्बर २३, २०१८
भगवान अयप्पा मंदिरमें सभी आयुकी महिलाओंके प्रवेशके निर्णयपर जारी गतिरोधके मध्य केरल सरकारने शुक्रवार, २३ नवम्बरको उच्च न्यायालयको सूचित किया कि सबरीमला मंदिरमें महिलाओंको पूजा करनेके लिए दो दिवसका समय अलगसे निर्धारित किया जा सकता है ।
उच्चतम न्यायालयके निर्णयके अन्तर्गत सुचारू यात्राके साथ ही मंदिरमें महिलाओंकी पूजा अर्चनाके लिए सुरक्षा मांग कर रही चार महिलाकी ओर से प्रविष्ट याचिकापर सुनवाईके समय ये सुझाव आए ।
चार महिलाओंने अपनी याचिकामें सबरीमला जानेकी इच्छा रखने वाली सभी आयुकी महिलाओंके लिए विशेष रूपसे दो से तीन दिन निर्धारित करनेके सुझाव दिए ।
सुनवाईके समय राज्य सरकारने न्यायालयसे कहा कि तीर्थ यात्राके समय महिला श्रद्धालुओंके लिए अलगसे दो दिवसका समय निर्धारित किया जा सकता है ।
मुख्य न्यायाधीश हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति ए के जयशंकरण नांबियारकी पीठने रेशमा निशांत, शनिला सजीश, धान्या वी एस और सूर्या एमकी ओरसे प्रविष्ट याचिकापर सुनवाई की ।
याचिकाकर्ताओंने कहा कि मंदिर जाकर पूजा अर्चना करनेकी उनकी बहुत इच्छा है, किन्तु कुछ लोगोंके विरोधके कारण वे मंदिरमें घुस नहीं पायीं ।
“केरलके विधर्मी मुख्यमन्त्री कुछ दिवस पूर्व कह रहे थे कि हम उच्चतम न्यायालयके आदेशको लेकर बाध्य है और अब स्वयं ही निर्णयसे ऊपर जाकर अलगसे दो दिवसके लिए कह रहे हैं ! इसका अर्थ स्पष्ट है कि मुख्यमन्त्रीका आदेशसे कोई लेना देना नहीं है और वे केवल हिन्दुओंकी मान्यताओंको तोडनेके लिए यह दुष्कृत्य कर रहे हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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