जैसे कुछ पन्थोंमें करते हैं, वैसे हिन्दू धर्ममें धर्मप्रसार कर केवल स्वयंके धर्म व अनुयायियोंकी संख्या बढानेका महत्त्व नहीं है; अपितु हिन्दू धर्ममें धर्मकी गहनता और सूक्ष्मतामें जानेका महत्त्व है । इसका अर्थ है, ‘हिन्दू धर्ममें हिन्दू धर्मके शाश्वत मूल्य व सिद्धान्त समझकर तदनुसार आचरण कर धर्मकी अनुभूति, अर्थात साक्षात ईश्वरकी अनुभूति लेनेका महत्त्व है ।’ हिन्दुओंका धर्मप्रसार इसी तत्त्वपर आधारित होनेके कारण, जिन्हें हिन्दू धर्मकी कणमात्र भी जानकारी नहीं है, ऐसे अन्य पन्थके विदेशी लोग आज भी हिन्दू धर्मकी ओर आकर्षित होकर हिन्दू धर्मानुसार आचरण कर रहे हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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