जनवरी ७, २०१९
विवादित वक्तव्योंसे कांग्रेस नेतृत्वके लिए कठिनाई उत्पन्न करने वाले मणिशंकर अय्यरने एक बार पुनः विवादित वक्तव्य दिया है ! एक कार्यक्रममें मणिशंकर अय्यरने कहा है कि राजा दशरथ एक बडे राजा थे, उनके प्रासादमें (महलमें) १० सहस्र कक्ष थे; परन्तु भगवान राम किस कक्षमें वितरण हुए थे ?, यह बताना कठिन है । मणिशंकर अय्यर ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’द्वारा देहलीमें आयोजित कार्यक्रम ‘एक शाम बाबरी मस्जिदके नाम’में भाग ले रहे थे ।
मणिशकंर अय्यरने कार्यक्रममें लोगोंको सम्बोधित करते हुए कहा, “हम कहते हैं मंदिर आप अवश्य बनाइए अयोध्यामें, यदि आप चाहते हैं; परन्तु आप कैसे कह सकते हैं कि मंदिर वहीं बनाएंगें ! मंदिर वहीं बनानेका क्या अर्थ बना ? दशरथ एक बडे महाराजा थे, कहा जाता है कि उनके प्रासादमें १० सहस्र कक्ष थे ! कौन जानता है कि कौनसा कक्ष कहां था; इसलिए यह कहना कि ‘हम सोचते हैं कि हमारे भगवान राम यहीं अवतरित हुए थे; इसलिए वहीं बनाना है और क्योंकि एक मस्जिद है वहां; इसलिए हम उसके पहले तोडेंगें और उसके स्थानपर हम बनाएंगें’, हम ये कहें कि अल्लाहमें विश्वास रखना कोई अनुचित कार्य है, एक हिन्दुस्तानीके लिए !”
“वहां पहले राममन्दिर ही था यह तो सर्वविदित ही है और पूर्वकालमें द्वादश ज्योतिर्लिंगसे लेकर कोई भी देवालय विज्ञानके आधारपर ही बनाया जाता था और सहस्रों वर्षोंसे पूजा होनेके कारण वहां देवताओंकी प्रखर सूक्ष्म तरंगें कार्यरत होती थी । पूर्वकालमें धर्मवीर लोग वानप्रस्थाश्रममें प्रवेशकर प्रौढावस्थामें तपश्चर्या करते थें, बालकोंको संस्कार देते थे; परन्तु आजके नेता स्वार्थ, लालच व कुर्सीके मोहमें राजनीतिमें रहकर ही प्राणत्याग करते हैं तो ऐसे नेताओंसे धर्मज्ञानकी आशा रखी जा सकती है क्या ? अतः मणिशंकर अयैरका बिना ज्ञान इस विषयपर ज्ञान देना मूर्खतापूर्ण ही कहलाएगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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