जनवरी ९, २०१९
अफगानिस्तानमें रहकर जीवन यापन कर रहे थे; परन्तु एक विस्फोटने सब कुछ नष्ट कर दिया । आशाकी किरण लेकर भारत लौटे; परन्तु यहां भी उद्विग्न हैं । काबुलसे भारत आए शरणार्थी अमरजीत कौर उद्विग्न है । तीन बच्चोंके साथ मानसिक रूपसे रोगी पतिका उत्तरदायित्व है; परन्तु चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है । काबुलमें सुसर परिवारको चलाते थे; परन्तु एक बम विस्फोटने सब कुछ नष्ट कर दिया । ससुरकी मृत्युके बाद परिवार भोजनके लिए तरस गया ।
बच्चोंके भविष्यकी चिंताके साथ भारत लौटी, सोचा था कि कोई कार्य करके परिवारको चला लेंगें; परन्तु, परिवारको चलाना तो दूर, घरसे निकलना भी विकट हो गया है । अमरजीत कौरका आरोप है कि उसको और उसके परिवारको धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्ममें अपना लेनेको कहते हैं । नागरिकता संशोधन विधेयक २०१६ के लोकसभामें पारित होनेके पश्चात भारतमें रह रहे शरणार्थी अमरजीतकी आशाएं और बढ गई है ।
नागरिकता संशोधन विधेयकको लेकर अफगान शरणार्थी मनोहर सिंहका कहना है कि हमारे ही देशमें हमें भारतीय नहीं गिना जाता है, यह हमारी विडम्बना है । हम नागरिकताके लिए २०-२५ वर्षसे प्रयास कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि मैं सभी दलोंसे विनती करता हूं कि इस विधेयकको पारित कर दें ।
“प्रशासन ऐसे पीडित भाईयोंको सम्मानपूर्वक स्थान दें, ऐसी सभी राष्ट्रवादियोंकी अपेक्षा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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