जनवरी १७, २०१९
सबरीमाला मन्दिरमें प्रवेश करनेवाली दो महिलाएं कनकदुर्गा और बिन्दु अम्मिनी प्रकरणकी शुक्रवार, १८ जनवरीको उच्चतम न्यायालयमें सुनवाई होगी । दोनों महिलाओंने दो जनवरीको भारी सुरक्षाके मध्य सबरीमाला मन्दिरमें छलसे प्रवेश किया था, जिसका प्रखर विरोध भी हुआ । अपनी सुरक्षाको लेकर दोनों महिलाओंने न्यायालयमें याचिका प्रविष्टकर सुरक्षाकी मांग की है ।
सबरीमाला मन्दिरके दर्शनकर लौटी कनकदुर्गा और बिन्दु अम्मिनीको निरन्तर चेतावनी मिल रही हैं । इस मध्य कनकदुर्गापर तथाकथित प्रहार की भी बात सामने आई है । बताया जा रहा है कि उसपर प्रहार करनेवाला कोई बाहरी नहीं, वरन उसकी स्वयंकी सास थी, जो उसके सबरीमाला मंदिरमें प्रवेशके विरुद्ध थी ।
उल्लेखनीय है कि दोनोंने २ जनवरीको रात्रिमें पुरूषोंके वस्त्र पहनकर पुलिस बलका आश्रय ले छलसे सबरीमालामें प्रवेश किया था ।
“आश्चर्य है कि केरलमें इतने हिन्दू मर चुके हैं, इतने कारावासमें हैं और कितनोको ही पीडित किया जा रहा है; परन्तु न्यायालयके कानपर जूं तक न रेंगी ! और दो धर्महीन महिलाएं, जिनका समर्थन उनके परिवारवाले भी नहीं करते हैं, उनके लिए उच्चतम न्यायालय एक दिवसमें ही सुनवाई कर रहा है ! क्या इससे अधिक हिन्दूद्रोहिताका प्रमाण हो सकता है ? न्यायालय यही सन्देश दे रहा है कि हिन्दुओंके लिए न्यायकी आशा रखना व्यर्थ है; अतः अब धर्मराज्यकी स्थापनाके अतिरिक्त कोई उपाय नहीं है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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