जनवरी २४, २०१९
राजस्थान पुलिसने राज्यमें स्वेच्छासे प्रेम विवाह करनेवाले व्यस्कोंको सुरक्षा प्रदान करनेके लिए एक हेल्पलाइन आरम्भ की है ।
पुलिसके अनुसार राज्यमें अन्तर्जातीय अथवा भिन्न-भिन्न धर्मों सहित स्वेच्छासे विवाह करनेवाले व्यस्कोंको उनके जाति समाजके लोगोंद्वारा उद्विग्न करने अथवा अनावश्यक वैधानिक कार्यवाहीके प्रकरणोंमें आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाएगी । राजस्थान उच्च न्यायालयकी जयपुर पीठके एक आदेशानुसार अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स) जंगा श्रीनिवास रावने बुधवार, २३ जनवरीको एक परिपत्र जारीकर राज्यके सभी पुलिस उपायुक्तों एवं अधीक्षकोंको राज्यमें स्वेच्छासे विवाह करनेवाले व्यस्कोंको सहायता व सुरक्षाके लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं ।
“क्या समस्त उच्छृंखलता व दिशाहीन समाजके निर्माणका समग्र उत्तरदायित्व न्यायालयपर है ? स्वतन्त्र भारतमें साधारण नागरिकको इतना भी सुख नहीं है कि पुलिसके रहते भी स्वच्छन्द रूपसे श्वास ले सके और दिशाहीन युवाओं और लवजिहादको बढावा देनेके लिए ऐसे दिशाहीन निर्णय दे रहा है, जो केवल पुलिसका भार ही बढाएंगें । कलको यदि कोई धर्मान्ध हिन्दू युवतीको भगाकर ले जाता है और पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है और फिर एक दिन वह धर्मान्ध उस हिन्दू युवतीको केवल एक काफिर समझकर शोषण करेगा, तब न्यायालयके पास कोई उपाय योजना है ? क्या न्यायालय उस युवतीके मरनेसे पूर्व उसे न्याय दिलवा पाएंगें ? कुछ नियम समाजने बनाए होते हैं, जिनका पालन करना और करवाना परिवारवालोंका ही उत्तरदायित्व है । न्यायालय निराधार बातोंके स्थानपर साधारण जनताको सुरक्षा प्रदानकर स्वच्छन्द श्वास दिलवानेकी कृपा करें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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