जनवरी २४, २०१९
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार, २३ जनवरीको लोकसभा मतदानके लिए प्रचार करने अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी गए थे । इस मध्य एक ओर जहां वो प्रचारमें लगे हुए थे तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग राहुल गांधीके विरुद्घ प्रदर्शन करते हुए दिखे । वास्तवमें ये लोग अमेठीके किसान थे, जो कांग्रेसपर उनकी भूमि छीननेका आरोप लगा रहे थे ।
प्रदर्शन कर रहे किसानोंने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’को दी थी । उनकी मांग है कि या तो उनकी भूमि उन्हें वापस की जाए या उन्हें कार्य (रोजगार) दिया जाए ।
विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानोंमेंसे एक संजय सिंहने कहा, “हम राहुल गांधीसे निराश हैं । उन्हें इटली वापस चले जाना चाहिए । वो यहां रहनेके योग्य नहीं है । उन्होंने हमारी भूमि छीनी है ।
१९८० में जैन भाईयोंने कौसरके उद्योगीय क्षेत्रमें ६५.५७ एकडकी भूमि ली थी । वो यहां एक उद्योग चलाना चाहते थे; परन्तु परियोजना विफल हो गई, जिसके पश्चात २०१४ में भूमिकी नीलामी हो गई । नीलामीमें क्रय की गई भूमिका भुगतान १,५०,००० रुपएके मुद्रांक शुल्कपर (स्टांप ड्यूटी) ‘राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट’की ओरसे किया गया । बादमें ‘यूपीएसआईडीसी’ने इस नीलामीको अमान्य कर दिया, जिसके पश्चात गौरीगंज न्यायालयने आदेश दिया कि इस भूमिको ‘यूपीएसआईडीसी’को सौंप दिया जाए । तबसे पत्रोंमें तो ये भूमि ‘यूपीएसआईडीसी’के पास है; परन्तु ‘राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट’के अधिकारमें हैं ।
“समूचे देशमें राहुल गांधी किसानोंके समर्थनमें बोलनेका ढोंग कर रहे हैं और अमेठीमें वहीं किसानोंकी भूमिपर अधिकार कर बैठे हैं । यह दोहरा मापदण्ड ही कांग्रेसकी वास्तविकता है । यद्यपि किसानोंकी सबसे अधिक बुरी स्थिति कांग्रेसने ही की, तथापि आज अन्य राज्योंमें झूठे चुनावी वचनोंके जालमें फंसकर किसान कांग्रेसको वोट करके आए व परिणाम समक्ष है ! यह सब किसानोंके लिए शिक्षाका समय है । यदि सभी पूर्वमें हुए प्रकरणसे बोध लेंगें तो राहुल गांधी इटली तो स्वतः ही चले जाएंगें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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