जनवरी ३०, २०१९
भले ही मुस्लिम समाजमें तलाक व आदेश अवैधानिक हों; परन्तु कुछ लोग अभी भी इसका प्रयोग अन्धाधुन्ध कर रहे हैं । ऐसा ही एक प्रकरण ग्वालियरमें सामने आया, जहां पुलिसमें एक उपपुलिकर्मी महिलाको उसके हवलदार पतिने न केवल तलाक दिया, वरन दूसरा विवाह भी कर लिया ।
मध्य प्रदेश पुलिसमें पदस्थ महिला एसआईको हवलदार पतिने तीन बार बोलकर तलाक दे दिया ! इतना ही नहीं अपना प्रथम विवाह छिपाकर दूसरा विवाह कर लिया ! इतनेपर भी पति नहीं माना और पति व उसके परिजनोंने महिला एसआईके विरुद्घ भोपाल स्थित मस्जिद समितिसे फतवा भी जारी करा दिया, जबकि इसप्रकारके तलाक व फतवे अवैधानिक हैं !
पत्नीने मंगलवारको एसपीके समक्ष जनसुनवाईमें पहुंचकर बताया कि सोमवारको वह जब बैंकमें रुपए निकालने पहुंचीं, उस समय पति इमरानने उनके साथ मारपीट की । एसआईने स्वयं व पुत्रीको पति व उसके परिजनोंसे प्राणसंकट बताते हुए आवेदन देकर कार्यवाहीकी भी मांग की है ।
पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय तिघरामें चाकरी कर रही महिला एसआई यासमीन खानने एसपी नवनीत भसीनको परिवादमें बताया कि फरवरी २०१५ में उनका विवाह इमरानसे हुआ था । विवाहके १५-२० दिवस पश्चात ही इमरान व उसके परिजनोंने दहेजके लिए उद्विग्न करना आरम्भ कर दिया । भोपालमें सदनिका (फ्लैट) दिलानेके लिए भी उसे प्रताडित किया जाता रहा । यासमीनने परिवादमें यह भी बताया कि देवासमें पदस्थापनाके समय इमरानने उनसे भ्रष्टाचारकर रुपए अर्जितके लिए भी दबाव बनाया था ।
गर्भवती होनेपर अवैधानिक ढंगसे भ्रूण लिंग परीक्षण कराया । पुत्रीका जन्म होनेपर ससुराल पक्षकी प्रताडना और बढ गई । निरन्तर प्रताडनासे उद्विग्न होकर देवासमें घरेलू हिंसाका प्रकरण प्रविष्ट कराया । इसके पश्चात इमरान व उनके परिजनने उनके विरुद्घ उनके विभागमें परिवाद करवाने कलंकित करने लगे और झूठे प्रकरणमें फंसानेकी चेतावनी देने लगे । इन्हीं सबसे उद्विन होकर पुलिस पत्नीने अपने ही विभागके पतिपर कार्यवाही की मांग की है ।
“स्पष्ट है कि धर्मान्ध पुलिसवाला हो अथवा जिस भी पदपर, अपने कुकृत्य नहीं छोडता है । तीन तलाक और फतवे अवैधानिक होनेके पश्चात भी धर्मान्ध उसे कर रहे हैं; क्योंकि उहें विधानका भय ही नहीं है ! शासन तुष्टिकरणके चलते इसपर विधान पारित नहीं कर रहा है और राष्ट्र एक कुप्रथाको झेल रहा है और इसके कुसंस्कार अन्योंपर भी कुप्रभाव डाल रहे हैं; परन्तु कुर्सीका मोह लिए रजोगुण व तमोगुण सम्पन्न राजनेताओंको यह बात कहां समझ आती है । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
Leave a Reply