धर्मान्ध शिक्षकका विषवमन, नहीं कहूंगा ‘वन्दे मातरम्’, इस्लाम इसकी नहीं देता आज्ञा !!


जनवरी ७, २०१९


बिहारके कटिहारमें एक प्राथमिक विद्यालयके अध्यापकने गणतन्त्र दिवसके अवसरपर राष्ट्रगान गाने और वन्दे मातरम कहनेसे मना कर दिया था । इसी बातको लेकर पूरे क्षेत्रमें हंगामा मचा हुआ है । गांववाले विद्यालयके बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं । आरोपी शिक्षकका अभिज्ञान कर लिया गया है । वह मनिहारी प्रखण्डके प्राथमिक विद्यालय अब्दुल्लापुरमें बच्चोंको पढाता है । इसका नाम अफजल हुसैन है ।

अफजल हुसैनने कहा है कि संविधानमें कहींपर भी ‘वन्दे मातरम्’की अनिवार्यता नहीं है ! ऐसेमें धार्मिक मान्यताको देखते हुए मैंने गणतन्त्र दिवसपर राष्ट्रगान गाने और ‘वन्दे मातरम्’ कहनेसे मना कर दिया । हुसैनने कहा कि हम अल्लाहकी वंदना करते हैं और ‘वन्दे मातरम्’का अर्थ है भारतकी ‘वंदना’ (उपासना), जो हमारे विश्वासके विरुद्ध है । संविधान यह नहीं कहता कि इसे गाना आवश्यक है !

अध्यापकके इस कुकृत्यका किसीने वीडियो बनाकर उसे सामाजिक प्रसार माध्यमपर प्रसारित कर दिया । यद्यपि आपको बता दें कि अफजल हुसैन अब भी अपनी बातोंपर बना हुआ है । उसका कहना है कि वह न तो राष्ट्रगान गाएंगे और न ही ‘वन्दे मातरम्’ कहेंगे; क्योंकि इस्लाम इसकी आज्ञा नहीं देता है ।

 

“मौलवियोंने धर्मान्धकी बुद्धिमें विष इसप्रकार भरा हुआ है कि उसे यह ज्ञात नहीं कि वह इस्लामका दिया हुआ नहीं, वरन इस राष्ट्रकी दी भिक्षापर जीवन व्यतीत कर रहा है । इस्लाम अभी ‘वन्दे मातरम्’की आज्ञा नहीं देता है, कल जब बहुसंख्यक हो जाएंगें तो इस्लाम मन्दिरोंको भी तोडनेको कहेगा, तब इस्लाम हिन्दुओंको मारने और उनकी युवतियोंको उठाकर जिहाद करनेको कहेगा और तब अन्ततः इस्लाम भारतको इस्लामिक राष्ट्र बनानेको कहेगा !! हिन्दुओ ! क्या इसी बातकी प्रतिक्षा है ? और शासकवर्गका इसपर मौन और चिन्ताजनक है । भारतके आश्रयपर पलनेवाले कृतघ्नोंका भारतकी वन्दना न करना केवल राष्ट्रद्रोह है और इसका केवल एक ही विधान होना चाहिए और वह है मृत्युदण्ड !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : फर्स्टपोस्ट



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