जनवरी ९, २०१९
भारिपा बहुजन महासंघके नेता प्रकाश अंबेडकरने शनिवार, ९ फरवरीको कहा कि कांग्रेसको दोनों दलोंके मध्य सीटोंके तालमेलपर वार्ता आरम्भ करनेके लिए ‘आरएसएसपर नियन्त्रण कसने’की योजनाके साथ आगे आना होगा । अंबेडकरने रवि भवनमें एक संवाददाता सम्मेलनको सम्बोधित करते हुए आरोप लगाया कि ‘आरएसएस’ संविधानमें विश्वास नहीं रखता है और वह समानान्तर शासन चला रहा है । उन्होंने दावा किया कि जहां संविधानके अन्तर्गत एक शासन भारतके राष्ट्रपतिकी अध्यक्षतामें है, दूसरा शासन असंवैधानिक है और ‘आरएसएस’के संचालनमें है । कांग्रेस यह सुनिश्चित करनेके लिए किसी योजनाके साथ आए कि आरएसएसको संविधानके भीतर लाया जाए । उन्होंने कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडेके विरुद्घ पुलिस जांचका वर्णन करते हुए दावा किया, ‘‘उन्होंने पांच सहस्र पृष्ठोंकी एक प्राथमिकी प्रविष्ट की है, जिसमें कोई साक्ष्य नहीं है, जो साक्ष्य विधेयकके अन्तर्गत टिक सके । प्राथमिकीके भागके रूपमें उनकी ओरसे प्रस्तुत लिखितपत्रमें कहीं उनका नाम नहीं है, केवल आनंद नामका वर्णन है । इस आधारपर उन्होंने आनंद तेलतुंबडेको एक आरोपी बनाया है ।’’
“गत दिवसोंमें प्रकाश अम्बेडकरने कहा था कि ‘वन्दे मातरम’की आवश्यकता नहीं है तो क्या वह संविधान अन्तर्गत था ? देशमें सबसे अधिक धर्मान्तरण दलितोंका होता है, तब ये दलितोंके तथाकथित संरक्षक कहां जाते हैं ? वास्तवमें प्रकाश अम्बेडकर अपने पूर्वजोंके नामपर बैठे-बैठे सत्ता भोग रहे हैं और नामके लिए और राजनीतिके लिए दलितोंको भडकानेका कार्य करते हैं ! अब ‘आरएसएस’पर नियन्त्रणकी बात कर रहे हैं । इससे उतम होगा कि वे पहले कुछ एक-दो उत्तम कार्यकर उपलब्धि प्राप्त कर आगे आए, तब कुछ कहे; अन्यथा लोग आपके भीतर संस्कार न होनेकी ही दुहाई देकर कपूत बंकर राष्ट्रद्रोही होनेकी ही संज्ञा देंगें ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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