फरवरी १२, २०१९
ब्यावरके एक मदरसेमें अध्ययनरत बच्चोंसे अश्लील कृत्य करनेके प्रकरणमें मौलवी मोहम्मद आलमको सिटी थाना पुलिसने बन्दी बना लिया है । बादमें उसे अजमेरकी ‘पोक्सो न्यायालय’में प्रस्तुत किया, जहांसे उसे १९ फरवरीतक न्यायिक अभिरक्षामें भेज दिया ।
सिटी थाना प्रभारी रविन्द्रप्रतापसिंहने बताया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद उमरदराज खानने सिटी थानेमें दस जनवरी २०१९ को प्रकरण प्रविष्ट कराया । इसमें नगरके एक मदरसेके मौलवी मोहम्मद आलमपर ‘भारतीय दण्ड संहिता व पोक्सो एक्ट’के अन्तर्गत विभिन्न आरोप लगाए थे ।
ब्यावरके एक मदरसेसे गत एक अगस्तकी रात्रिको हरियाणा निवासी तीन बच्चे बिना बताए निकल गए । पुलिसको गश्तके समय ये बच्चे थैला लेकर जाते हुए मिले । बच्चे छोटे होनेसे पुलिसने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने मदरसेसे निकलकर घर जानेकी जानकारी दी । पुलिस इन बच्चोंको थाने ले गई । एक बच्चा तो वापस मदरसेमें चला गया; परन्तु दो बच्चोंने मदरसे जानेसे मना कर दिया ।
सूचना मिलनेपर तत्कालीन पुलिस उपअधीक्षक सी.एस. सोढा भी सदर थाने पहुंचे और प्रकरणकी जानकारी ली । उन्होंने इस प्रकरणमें मदरसा संचालकसे भी पूछताछ की । पुलिसने अजमेरसे ‘चाइल्ड लाइन’के दलको बुलवाया । दोनों बच्चोंको ‘चाइल्ड लाइन’ दलको सौंप दिया । पुलिसने इस प्रकरणकी जानकारी बच्चोंके परिजनको दी; परन्तु पुलिसको कोई परिवाद नहीं दी गई ।
बादमें इस प्रकरणमें बच्चोंसे की गई पूछताछके आधारपर ‘चाइल्ड लाइन’ने जिला प्रशासनको परिवाद दी थी । इसमें बच्चोंकी ओरसे मौलवीपर गम्भीर आरोप लगाए गए थे । परिवाद मिलनेपर तत्कालीन जिलाधिकारीने एसडीएमको जांचके आदेश दिए । उपखण्ड अधिकारीने जांच ब्यौरा जिलाधिकारीको भेज दिया ।
“इसका एक ही समाधान है, वह है मदरसोंपर प्रतिबन्ध ! मदरसोंपर राष्ट्रद्रोह, धर्मद्रोह व धर्मान्धताके आरोप लगते रहे हैं तो इन्हें पोषित करना या सुधरनेकी आशा करना व्यर्थ है; क्योंकि मधरसोंमें रहनेवाले तथाकथित शिक्षक जिन्हें मौलवी कहते हैं, उसका कार्य है केवल कट्टरता प्रसारित करना !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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