मार्च १२, २०१९
न्यूजीलैंडके साउथ आइलैण्डमें रहनेवाले जसविंदर पालने एक क्रय-विक्रय भण्डारसे (सुपरमार्केटसे) दण्डके रूपमें भारत आने-जानेका व्यय मांगा है । उनका आरोप है कि सिंतबरमें उन्होंने ‘ब्लेनहाइम काउंटडाउन मार्केट’से लैंब मीट (भेडका मांस) क्रय किया था; परन्तु उसे खानेके पश्चात ज्ञात हचा कि बीफ (गाेवंशका मांस) दे दिया गया । जसविंदरका कहना है कि अब वह भारत जाकर सन्तोंसे शुद्धि कराना चाहते हैं ।
न्यूजीलैंडकी ‘स्टफ’ जालस्थलसे वार्तामें जसविन्दरने बताया कि हिन्दू धर्ममें गायको एक पवित्र पशु माना गया है और इन्हें मारना पाप होता है । जसविंदरके अनुसार, जबसे उन्होंने गायका मांस खाया है, तभीसे परिवार उनसे बात नहीं कर रहा; इसलिए वे भारत जाकर चार-छह सप्ताहमें शुद्धि कराकर धर्मके मार्गपर आना चाहते हैं ।
जसविंदरका कहना है कि जब उन्हें इसका आभास हुआ तो वे ‘सुपरमार्केट ‘ अर्थदण्ड लेने पहुंचे । यद्यपि, वहां कर्मचारियोंने उनसे क्षमा मांगते हुए २०० डॉलरका (लगभग १४ सहस्र रुपए) एक ‘गिफ्ट वाउचर’ देना चाहा; परन्तु जसविंदरने इसे लेनेसे मना करते हुए भारत आने-जानेके विमानका व्यय मांग लिया ।
इसके पश्चात जसविंदर गत पांच माहसे इस प्रयासमें हैं कि ‘सुपरमार्केट’ उन्हें अर्थदण्ड दे दे । यद्यपि, कई प्रयासके पश्चात अब वे न्यायालयकेद्वारा अर्थदण्ड लेना चाहते हैं । जसविंदरका कहना है कि उनका एक छोटा व्यापार है, ऐसेमें भारत जानेके लिए उन्हें धनका एक बडा भाग व्यय करना पडेगा । यद्यपि, वह एक बडी कम्पनीके विरुद्घ प्रकरणको आगे नहीं घसीटना चाहते; परन्तु और कोई विकल्प नहीं है ।
“निधर्मी उद्योगोंका कार्य केवल येन-केन प्रकारसे लाभ अर्जित करना होता है । उनका न ही धर्मसे कोई लेना-देना है और न ही मूल्योंसे; क्योंकि इन सबको परेय रखकर ही आजके लोभी उद्योग फलते-फूलते हैं, जिसके कारण ऐसे कृत्य होते हैं; परन्तु प्रायः ऐसे कृत्य जो उजागर हो रहे हैं, उनसे एक बात स्पष्ट है कि पाश्चात्य तामसिक संस्कृतिमें रहकर धर्मपालन सम्भव नहीं है । अतः हिन्दुओ ! धर्मपालन हेतु स्वदेशमें रहना ही उचित है । कुछ समयके सुखके लिए अपने लोक और परलोकको नष्ट करना मूढता ही कहलाती है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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