श्रीगुरु उवाच


साधनाके कारण ‘ईश्वर प्राप्ति हो’, ऐसा लगनेपर पृथ्वीपरकी किसी भी वस्तुकी अपेक्षा नहीं रहती; अतः किसीके प्रति जलन, मत्सर अथवा द्वेष नहीं होता, उसीप्रकार अन्योंसे दूरी, विवाद नहीं होते । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution