उतिष्ठ कौन्तेय
उतिष्ठ कौन्तेय (१६/०४/२०२०)
१. जिहादियोंद्वारा चिकित्सकोंपर प्रहार करने की घटना अब उत्तर प्रदेशके मुरादाबाद जनपदकी है । समाचारके अनुसार जब चिकित्सकोंका दल संक्रमणसे पीडित व्यक्तियोंको लेने क्षेत्रमें पहुंचा तो जिहादियोंने उनसे विवाद किया व उपरांत उनपर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए जो इस नियोजन हेतु पूर्व ही एकत्रित किए गए थे । इस आक्रमणमें एक चिकित्सक अत्याधिक चोटिल हो गए । प्रकरणमें २ दर्जनसे अधिक जिहादियोंको बन्दी बनाया गया है व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजीने इनपर रासुका लगानेका आदेश दिया है।
_मतिभ्रष्ट जिहादी चिकित्सकोंको अपना शुत्र समझते हैं व अपने धर्म गुरुओंको सच्चा हितैषी । इसका प्रमुख कारण बाल्यकालमें दी गई उन्हें कट्टरताकी घुट्टी व मौलानाओंकी आज्ञा पालन है जिसका परिणाम दिन प्रतिदिन विस्फोटक रूपमें सबके समक्ष आ रहा है ।_
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२. २५ अप्रैल २०२० को महाराष्ट्रके मुंबईके बांद्रामें अचानक प्रवासी मजदूरोंकी भीड एकत्रित होनेका आरोप आदित्य ठाकरेने लॉकडाउनकी अवधि बढाया जाना बताया है । मुख्यमंत्री महोदयका कहना है कि प्रवासियोंकी देखभालकी जाएगी वे अपने अपने स्थानोंपर रहें । केंद्र सरकार इस प्रकरणमें राज्य सरकारकी पूरी सहायता कर रही है । लॉकडाउनके चलते इतने लोगोंका एकत्रित होना साधारण घटना नही है ।
_इस प्रकरणमें दिल्लीकी भांति प्रवासी मजदूरोंको बहलाकर एक स्थानपर एकत्रित करके लॉकडाउनको असफल बनानेका प्रयास किया गया है साथ ही करोनाको फैलानेका षडयंत्र किया है । प्रशासन इस प्रकरणसे सीख लेकर आगे सावधान रहे ।_
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३. देहलीके निजामुद्दीनमें स्थित तबलीगी जमातके मरकजपर अपराध शाखाने पकड बनाते हुए मौलाना साद सहित ७ लोगोंके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया है । बैंक खातोंकी छानबीन करते समय कुछ जमातियोने बताया कि मार्च माहके मध्यमें ही कार्यक्रममें भाग लेनेसे पहले उनको भोजन और अन्य खर्चोंके लिए भुगतान कर दिया था अर्थात उन्हें पैसे देकर बुलाया गया था । पुलिस इस बातकी भी जांच कर रही है कि कही पैसेके कारण ही लॉकडाउन होने पर भी मरकजके अधिकारियोंने उन्हें जाने के लिए नहीं कहा ।
तबलीगी जमातकी लापरवाहीने भारतकी बडी जनसंख्याको देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंगसे कोरोना वायरस संक्रमणपर काबू पानेकी चेष्टापर पानी फेर दिया है । ९ सहस्त्र जमातियोमें केवल एक तिहाई लोगोकी जानकारी है । बाकीका अता पता नहीं चला । इन जमातियोसे जुडे संक्रमित लोगोंमें लगातार वृद्धि हो रही है। प्रशासन ऐसे जिहादियोंपर कठोर कार्यवाही करे !
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४. उत्तर प्रदेशके बाराबंकीमें रामनगर थाना क्षेत्रमें लॉकडाउनके कारण घरमें बैठे एक युवक अफजल हाजीने अपनी पत्नी दरकशासे चाय मागी । बेटेके लिए दूधकी शीशी बना रही पत्नीद्वारा चाय न देनेपर अफजलने अपने आत्मसम्मान पर ले लिया और पत्नीको तीन तलाक देते हुए मारपीट करके बच्चे सहित घरसे बाहर निकाल दिया । परिवाद मिलनेपर पुलिसने अभियोग प्रविष्ट किया है ।
उल्लेखनीय है गत वर्षसे तीन तलाक़ जैसी कुरीतिसे मुस्लिम महिलाओंको मुक्ति दिलाने हेतु तीन तलाकको दंडनीय बनाया गया है । किन्तु ये धर्मांध लोग किसीभी विधानको अपनेपर लागू नहीं मानते, प्रशासनको इस विधानको धरातलपर लागू करनेके लिए कठोर निर्णय लेने होंगे !
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५. पूर्व सेनाधिकारी जयदेव जोशीके परिवाद करनेपर , गुजरात-राजकोटकी पुलिसने भारत भूषण नामक धर्मद्रोही वकीलके धर्मद्रोही व्यक्तव्यपर प्रकरण प्रविष्ट किया है , जिसमें भारत भूषणने रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रन्थोंकी तुलना ‘अफीम’से करते हुए अपमानजनक ट्वीट किया है , जबकि ‘एश्लिन मैथ्यू और गोपीनाथन कन्ननने भी उसका समर्थन किया है। उन्होंने हिदुओंकी आस्थाको आहत किया है । गोपीनाथनने कहा कि उसे बंदी बनाया जा सकता है, किन्तु वह मौन नहीं रहेगा , क्योंकि वह डरता नहीं है।
विरोधी गुटोंने तो केवळ हिन्दूधर्मके विरोधमें ही बोलनेका स्वभाव बना लिया है। पूरे भारतवर्षके न्यायालयोंमें शपथ हेतु रखे जाने वाले धर्मिक ग्रन्थोंपर अपमानजनक शब्द बोलनेवाले वामपंथियोंके चपलूसोंको भारीसे भारी दण्ड देना ही न्याय होगा। अन्यथा वे हिंदुओंकी भावनाओंका अनादर ही करते रहेंगें ।
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६. बिहारके सुरक्षाबलोंने विभिन्न देशोंसे आए उन ५७ पर्यटकोंको कारावासमें भेज दिया है जोकि आए तो पर्यटनके लिए थे , किन्तु सलग्न रहे वे जमातके धार्मिक प्रचारमें और छिपते रहे ‘मस्जिद’ धार्मिक स्थलोंमें। देशमें अनुचित ढंगसे छिपकर रहते हुए और पुलिस विभागको अपने रहनेकी सूचना न देनेके अपराधमें उन्हें बन्दी बनाया गया।
पारपत्र अधिनियमोंका धर्मांधों द्वारा बार-बार उलंघन करना , चिन्ताका एक विषय बन गया है।अन्य राज्योंको भी ऐसे घुसपैठियोंको ढूंढ निकलना और कडा दण्ड देना अति आवश्यक है ।
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७. इस्लामिक संगठन ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ने सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका प्रस्तुतकी जिसके अन्तर्गत निजामुद्दीन मरकजकी घटनाको लेकर ‘मीडिया’ (समाचार वाहिनियों)के एक वर्गद्वारा मुसलमानोंके विरुद्ध सांप्रदायिक घृणा प्रसारित करने का आरोप लगाया परन्तु सर्वोच्च न्यायालयने इसपर प्रतिबंध लगाने व त्वरित निर्णय देने हेतु असहमति जताई और अगली सुनवाई हेतु २ सप्ताह उपरांत की तिथि निर्धारित की। न्यायालयने यह भी कहा कि वह ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करेगा जो मीडियाकी हत्या करने के समान है ।
सत्यको कितना भी अंधेरेमें रखा जाए वह उजागर होकर ही रहता है उसी प्रकार जिहादी जितने भी प्रयत्न करे सत्य सबके समक्ष आने से रोक नहीं सकते। अतः सर्वोच्च न्यायाल के न्यायमूर्ति का यह आदेश सराहनाके योग्य हैं ।
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