घरका वैद्य – शकरकन्द (भाग-२)
२. उदरके (पेटके) व्रणमें (अल्सरमें) : शकरकन्द उदर और आंतोंके लिए अत्यधिक लाभप्रद होता है । इसके भीतर अत्यधिक पोषक तत्त्व होते हैं, जिनके कारण आपके उदरमें यदि व्रण (अल्सर) है तो वह भी ठीक हो जाएगा । इससे मलबन्ध (कब्ज) और वायु विकारकी समस्याका भी अन्त होता है ।
३. जल तत्त्वको बनाए रखनेमें (हाइड्रेटेड रखनेमें) – शकरकन्दमें ‘फाइबर’ होता है, जिसके कारण शरीरमें जलकी न्यूनता (डिहाइड्रेशन) कभी भी नहीं होती है । शकरकन्द जलकी मात्राको बनाए रखनेमें सहायक होता है ।
४. भार वृद्धिमें : भार वृद्धिके लिए शकरकन्द अत्यधिक उत्तम आहार है; क्योंकि इसके भीतर अत्यधिक मात्रामें ‘स्टार्च’ होता है और इसके अतिरिक्त इसमें ‘विटामिन’ और खनिज पाए जाते हैं । शकरकन्द सरलतासे पच भी जाता है और आपको अधिक ऊर्जा भी देता है; इसलिए यह भार वृद्धिमें सहायक होता है ।
५. प्रतिरक्षा प्रणालीमें :इसमें ‘विटामिन-सी’, ‘विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स’, ‘आयरन’ और ‘फॉस्फोरस’के साथ-साथ ‘बीटा कैरोटीन’ पाया जाता है, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणालीको बढानेमें सहायता करते हैं और हमारे शरीरको विभिन्न प्रकारकी परिस्थितियों और रोगोंसे बचाते हैं ।
६. श्वसन-शोथमें (ब्रोंकाइटिसमें) : श्वसन-शोथमें शकरकन्दका अवश्य ही सेवन करना चाहिए; क्योंकि इसके भीतर ‘विटामिन सी’, लौहतत्त्व और कई प्रकारके पोषक तत्त्व विद्यमान होते हैं, जिनके कारण यह रोग समाप्त हो जाता है । शक्करकन्दके सेवनसे शरीर उष्ण रहता है, शरीरका तापमान समान रहता है, जिससे यदि फेफडोंमें ‘कफ’ एकत्र हुआ है तो यह उसे अच्छी प्रकारसे निकालनेमें भी सहायक होता है, जिससे श्वास खुलकर आता है ।
Leave a Reply