आजकल पाश्चात्य भोजनालयोंमें भोजनके साथ शीतलपेय परोसनेका प्रचलन है और नेत्र मूंदकर विदेशियोंको अनुकरण करनेवाले भारतीय, उन्हें बडे गर्वसे पीते हैं और स्वयंको आधुनिक समझते हैं; किन्तु आयुर्वेद अनुसार ऐसा नहीं करना चाहिए । वस्तुत: भोजनके समय किसी भी प्रकारका, सामान्य तापमानसे नीचे कोई भी शीतल पेय, विशेषकर कृत्रिम शीतल पेय कदापि न पिएं और न ही भोजनके अन्तमें ‘आइसक्रीम’ ग्रहण करें, इससे जठराग्नि बुझ जाती है और पेटमें भोजन सडने लगता है, ऐसा होनेपर भोजनके सर्व पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं एवं अनेक रोगोंका जन्म होता है ।
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