बथुआ सागसे यकृतकी रक्षा करें : जब हम औषधि लेते हैं, तो कभी-कभी चिकित्सा, प्रभावके पश्चात भी वह अपना दुष्परिणाम (अवशेष) छोड देती है । अवशेष यकृतद्वारा अवशोषित किया जाता है और धीरे-धीरे शरीरमें फैलाया जाता है । एक अध्ययनसे पता चलता है कि बथुएकी पत्तियां, कुछ औषधियोंके अवशेषोंके लिए एक अच्छा प्रतिरक्षात्मक होती हैं । बथुएके सेवन करनेसे सभी प्रकारके विषाक्त पदार्थोंसे छुटकारा पाया जा सकता है ।
बथुआसे हानियां : सीमित मात्रामें सेवन करनेसे बथुआसे कोई भी हानि नहीं होती है; किन्तु यदि अधिक मात्रामें इसका सेवन किया जाता है तो इसके कुछ गम्भीर परिणाम भी हो सकते हैं ।
अधिक मात्रामें बथुआ सेवन करनेसे निम्न प्रकारकी समस्याएं हो सकती हैं :
* बथुएके पौधेमें ‘ऑक्सीलिक एसिड’ अधिक मात्रामें होता है, जो ‘कैल्शियम’की उपलब्धताको न्यूनकर सकता है; परिणामस्वरूप आपके शरीरमें ‘कैल्शियम’की न्यूनताके कारण हानि हो सकती है । इसलिए बथुएका सेवन न्यून मात्रामें करना आपके लिए लाभकारी है ।
* बथुएके बीजोंमें गर्भपातकी क्षमता होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओंको इसके सेवनसे बचना चाहिए ।
* यदि आप अधिक मात्रामें बथुएका सेवन करते हैं, तो उदरकी समस्याओंको बढा सकता है ।
* इस पौधेमें प्रजनन-विरोधी (anti-fertility) गुण भी होते हैं, जो अधिक मात्रामें सेवन किए जानेपर स्त्रीकी प्रजनन क्षमताको प्रभावित कर सकते हैं ।
* यदि अधिक मात्रामें बथुएका सेवन किया जाता है तो यह त्वचाकी संवेदनशीलताको बढा सकता है ।
* यदि सन्तुलित मात्रामें इसका सेवन किया जाए, तो इस प्रकारकी सभी समस्याओंसे बचा जा सकता है ।
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