पूर्व ‘आईएएस’ अधिकारी शाह फैसलने की ‘मनकी बात’ तो इस्लामी नामवाले भडके


०१ फरवरी, २०२१
        ‘कोरोना वायरस’ टीकाकरण अभियानकी प्रशंसा करनेके पश्चात पूर्व ‘आईएएस’ अधिकारी और ‘जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’के संस्थापक शाह फैसलने मोदी शासनद्वारा उठाए गए पगके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है ।
    प्रधानमन्त्रीके सम्बोधनकी स्तुति करते हुए शाह फैसलने ‘ट्वीट’ किया, “ऐसा प्रतीत होता है, मानो कि रविवारकी प्रातः १.३ ‘बिलियन’ लोगोंका परिवार एक साथ एकत्र होता है, प्रत्येकको सुना जाता है और उससे बात की जाती है, उनकी भावनाओंका सम्मान किया जाता है ।”
    उन्होंने आगे कहा, “इस कार्यक्रमसे मैंने यह समझा है कि संचार एकजुटताका निर्माण कर सकता है और एक राष्ट्रको एक परिवारकी भांति बना सकता है ।”
    कार्यक्रमकी प्रशंसा करनेके कारण उन्हें ‘सोशल मीडिया’पर कडी आलोचनाका सामना करना पड रहा है । ‘ट्विटर ट्रोल’ मोहम्मद आसिफ खानने तो उनपर अपनी आत्माको ‘बेचने’का आरोप लगा दिया !
    खानने ‘ट्वीट’ किया कि वह २०१९ में एक महान क्रान्तिकारी थे, परन्तु अब वे प्रधानमन्त्री मोदीके तलवे चाट रहे हैं । वहीं, उन्होंने पहले शाह फैसलको “सावरकरसे भी बडा चमचा और जूते चाटनेवाला’ बता दिया था !”
     वहीं मुनीब खानने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’के एक लेखका पटलचित्र (स्क्रीनशॉट) साझा किया, जिसमें शाह फैसलने कहा था कि कोई केवल कश्मीरमें एक चमचा या पृथकतावादी हो सकता है । पूर्व ‘आईएएस’ अधिकारीको कथित ढंगसे कश्मीरियोंको निरुत्साह करनेके लिए फटकार लगाते हुए खानने ‘ट्वीट’ किया, उसे ‘ट्रोल’ मत करो ।
         निश्चित ही सभी जानते हैं कि शाह फैजल राजनीतिमें असफल होनेपर अपने लिए नूतन धरातल ढूंढ रहे हैं और निश्चित ही सभीने ऐसे अवसरवादी लोगोंसे सावधान रहना चाहिए; परन्तु एक बात और  लोगोंकी प्रतिक्रियासे यह ज्ञात होता है कि किस प्रकार जिहादियोंके मनमें विष भरा हुआ है, जो इस राष्ट्रके लिए शुभ संकेत नहीं है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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