‘एनजीओ’से लेकर बेंगलुरु उपद्रव तक ‘फंडिंग’, चीनका बिना युद्ध किए विश्वविजयका षड्यन्त्र, ताइवानके लेखकने बताया
०९ फरवरी, २०२१
ताइवानके युद्ध विशेषज्ञ ‘प्रोफेसर’ केरी गेर्शनेक अपनी पुस्तक ‘पोलिटिकल वॉर फेयर चाइना’में लिखते हैं कि चीनका जन्म एक रक्तक्रान्तिसे हुआ था । यह एक ऐसा युद्ध था, जिसमें चीनी ‘कम्युनिस्ट’ पक्ष विजयी हुआ था । भौगोलिक सीमाओंके विस्तारका यह युद्ध कभी भी समाप्त ही नहीं हुआ । चीन निरन्तर अपनी सीमाओंमें विस्तार करता जा रहा है । उसका प्रथम लक्ष्य भारत है । बेंगलुरुमें कुछ दिन पूर्व एक ताइवानी यन्त्रशालापर (फैक्टरीपर) आक्रमण हुआ था । लेखकका मत है कि वह हिंसा चीनी षड्यन्त्रके अन्तर्गत की गई थी, जिससे भारतको निर्बल बनाया जा सके । भारतने अनेक चीनी ‘एप्स’पर प्रतिबन्ध लगाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की है; परन्तु चीनकी आक्रामक कार्यवाहियोंसे सुरक्षा हेतु भारतको अन्य देशोंके साथ एकजुट होकर कुछ निर्णय लेने होंगे ।
‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ सामाजिक जालस्थानोंकी सहायतासे राजनीतिक तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध करती है । उसने ‘साइबर फोर्स’की स्थापना की है, जिसमें उसके ३ लक्ष सैनिक तथा लगभग २० लक्ष सैनिकोंका एक समूह ‘५० सेन्ट आर्मी’ बनाया है । ये सभी नाम मात्रके धनके लिए ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’का प्रचार करते हैं ।
उल्लेखनीय है कि जब कभी देशकी भलाई हेतु कोई विधान गठित होता है तो विपक्षी एकजुट होकर विरोध करने लगते हैं । ‘सीएए’के समय शाहीनबाग आन्दोलन, देहलीका उपद्रव, अब किसान आन्दोलन, २६ जनवरीका उपद्रव यह सभी निश्चित ही विदेशी धनसे कार्यरत होते रहे हैं । कांग्रेसी तथा वामपन्थियोंका ऐसे आन्दोलनोंको अन्ध समर्थनभी विदेशी ‘फंडिंग’ जैसी शङ्का उत्पन्न करता है । भारत शासनको सतर्कतामें वृद्धिकर चीन जैसे षड्यन्त्रकारी देशसे अपने राष्ट्रकी रक्षा करनी होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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