आध्यात्ममें चरित्रवान होना आवश्यक है !


कुछ समय पूर्व हमारे आश्रममें एक युवा विवाहित स्त्री आश्रममें राजस्थानसे आई थीं और साथ ही एक और युवा पुरुष गुजरातसे आश्रममें आए थे, वे दोनों एक दूसरेसे ‘फेसबुक’के माध्यमसे पहलेसे ही परिचित थे । आश्रमके साधकोंने बताया कि कई बार दोनों आश्रमके एक कक्षका द्वार बन्द कर, कुछ बातें किया करते थे और यह उन्हें अच्छा नहीं लगा ! मैंने उन्हें बताया ऐसी कोई बात नहीं है, वे दोनों एक दूसरेसे पहलेसे परिचित हैं; अतः कुछ साधना सम्बन्धित अडचनोंके विषयमें बातें कर रहे होंगे ! साधकोंने तो मेरी बात मान्य कर, उनके प्रति अपने पूर्वाग्रह दूर कर लिए; परन्तु इस प्रसंगसे सभी साधक बोध लें । स्त्री और पुरुष, यदि निकटतम सम्बन्धी न हों तो उन्होंने कभी भी कक्ष बन्द कर एकान्तमें बातें नहीं करना चाहिए । अपने वर्तनसे कभी भी, किसीको भी आपके चरित्रपर सन्देह करनेकी कोई भी सम्भावना न छोडें ! आपका चरित्रवान होना अध्यात्ममें अत्यधिक महत्त्व रखता है । इस तथ्यपर स्त्रियोंको विशेष रूपसे ध्यान देना चाहिए और पुरुष साधकोंने भी ध्यान देना चाहिए कि उनके किसी वर्तनसे किसी परस्त्रीका चरित्र धूमिल न हो ! – तनुजा ठाकुर



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution