आजकी शिक्षाका गिरता स्तर


आजकी शिक्षाका स्तर इतना गिर गया है कि आजके स्नातक किए हुए विद्यार्थी भी पांच पंक्तियां बिना चूकके अपनी मातृभाषामें नहीं लिख पाते हैं । प्रथम मुझे लगा कि झारखण्डमें ऐसा है, उसके पश्चात उत्तर प्रदेशके युवावर्गके साथ भी मैंने ऐसा ही पाया, तत्पश्चात देहली और अब मध्य प्रदेशकी भी स्थिति ऐसी ही है । मुझे यह समझमें नहीं आता है कि कोई विद्यार्थी यदि पांच पंक्तियां शुद्ध नहीं लिख सकता है तो उसने स्नातक तककी पढाई की कैसे ?
 यदि सचमें इस देशके सामान्य युवा वर्गकी स्थिति ऐसी है तो यह घोर चिन्ताका विषय है ! अभी कुछ दिवस पूर्व एक युवती आश्रममें आई थी वह स्नातक कर चुकी थी; किन्तु उसे ‘कृपया’ यह शब्द लिखना नहीं आता था और अब वह संगणकमें डिप्लोमा कर रही है ! यह तो मैंने एक उदाहरण बताया है, मेरे पास ऐसे अनेक प्रसंग है, जिसे जाननेपर मैं प्रथम तो हतप्रभ हो गई थी एवं मुझे युवाओंकी इस स्थितिको देखकर बहुत ग्लानि होती है । मैं सोचमें पड गई हूं कि इनमें सुधार कहांसे आरम्भ किया जाए और कैसे किया जाए ? फेसबुक इत्यादिपर भी भाषाकी विकृति देखकर मन दुखी हो जाता है ! क्या आपने भी ऐसा ही कुछ अनुभव किया है ?



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