जुलाई ५, २०१८
पंजाबका कांग्रेस शासन नूतन विधान बनाने को सज्ज है, जिसके अन्तर्गत धार्मिक ग्रन्थोंसे छेडछाड करनेका दोषी पाए जानेपर, आजीवन कारावासका दण्ड दिया जा सकता है । अभी शासन इस संशोधनका प्रारूप तैयार कर रही है, जिसे शीघ्र ही विधानका (कानून) रुप दे दिया जाएगा । बता दें कि गत वर्ष मार्च माहमें केन्द्र सरकारने पंजाब विधानसभासे वर्ष २०१६ में पारित हुआ एक विधेयक लौटा दिया था, जिसमें सिखोंके सर्वोच्च धार्मिक ग्रन्थ ‘गुरु ग्रन्थ साहिब’से छेडछाड करनेपर ३ वर्षसे लेकर आजीवन कारावासके दण्डका प्रावधान करनेकी मांग की गई थी ।
सूत्रोंके अनुसार, केन्द्र सरकारने पंजाब शासनका विधेयक यह कहकर लौटा दिया था कि पंजाब शासन सभी धर्मोंके ग्रन्थोंको इस विधेयकमें सम्मिलित करे ! शासनने इसके पीछे तर्क देते हुए कहा था कि इस विधेयकसे देशके संविधानमें दिए धर्मनिरपेक्ष सिद्धान्तोंको हानि पहुंच सकती है । अब पंजाब शखसनने उसी विधेयकमें संशोधनकर, इसमें ‘गुरु ग्रन्थ साहिब’के साथ ही ‘गीता, कुरान और बाइबिल’को भी सम्मिलित कर लिया है । पंजाब शासनके वरिष्ठ नेताके अनुसार शीघ्र ही नए विधेयकको अन्तिम रुप दे दिया जाएगा और उसके पश्चात उसे पंजाब विधानसभामें पेश किया जाएगा !
ज्ञात है कि केन्द्र शासनने गत वर्स जब पंजाब शासनका यह विधेयक वापस लौटाया था तो उसमें शासनने इस बातपर भी चिन्ता दिखाई की थी कि वर्तमान विधेयकसे ‘इण्डियन पीनल कोड’में (आईपीसी) असन्तुलन पैदा होगा । धार्मिक ग्रन्थोंसे छेडछाडके दोषीको आजीवन कारावासका दण्ड केन्द्र शासनने अधिक भी बताया था । शासनने कहा था कि ‘आईपीसी’के अन्तर्गत पूजास्थलपर तोडफोड करनेका दण्ड २ वर्षसे लेकर १० वर्ष ही है, जबकि नए विधेयकमें धार्मिक ग्रन्थसे छेडछाडपर आजीवन कारावासकी मांगकी गई थी।श !
स्रोत : जनसत्ता
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