आजका मनुष्य इतना बहिर्मुख है कि घरमें दो-तीन माह भी नहीं रह सकता !


 दो दिवस पूर्व मेरी जर्मनीके उपासनाके एक साधकसे बातचीत हो रही थी । मैंने पूछा कि वहांकी स्थिति क्या है; क्योंकि वहांके समाचार पढने हेतु नहीं मिल रहे हैं ? तो उन्होंने कहा कि अभीतक एक लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं । मैंने उनसे पूछा, “भारतमें जिहादी मलेच्छों, अशिक्षितों व स्वार्थान्धोंद्वारा सामाजिक दूरीका नियम न पालन करनेका कारण तो समझमें आता है; किन्तु जर्मनी तो एक विकसित राष्ट्र है, वहां सभी लोग शिक्षित हैं तो यह रोग इतने कठोर अनुशासनप्रिय देशमें कैसे पसर गया ?” तब उन्होंने बहुत अच्छी बात कही, वह आपसे साझा करती हूं । उन्होंने कहा, “यहांके लोग बहिर्मुखी हैं, उन्हें बाहर जाकर ‘मौज-मस्ती’ किए बिना चैन ही नहीं मिलता है । धन अर्जित करना और उसका उपयोग मात्र अपने इन्द्रिय सुख हेतु करना, इन्हें मात्र यही आता है । उनकी वृत्ति ही ऐसी है; इसलिए शासकीय निर्देशोंकी धज्जियां उडाते हुए, वे शुक्रवार, शनिवार और रविवार पार्टी करते रहे और आज परिणाम सबके सामने है ।”
 वस्तुतः निधर्मी शिक्षण प्रणालीसे शिक्षित व्यक्ति विवेकशून्य व स्वार्थी होता है । उसे समाज हित व देश हितसे कोई लेना-देना नहीं होता है ।
सोचिए ! आजका मनुष्य कितना बहिर्मुख है कि उसकी इस महामारीसे मृत्यु हो सकती है, उसके कुटुम्बको इसका संक्रमण हो सकता है, तब भी वह अपने घरमें दो-तीन माह नहीं रह सकता । बहिर्मुख व्यक्ति बाहर सुख ढूंढता है और अन्तर्मुखी जीव स्वयंके भीतर सुख ढूंढता है; किन्तु मात्र और मात्र साधना करनेसे ही जीव अन्तर्मुखी हो सकता है । यदि आजका समाज अन्तर्मुखी होता तो पुलिसको इन्हें घरके भीतर रखने हेतु निषेधाज्ञा (कर्फ्यू) न लगाना पडती, उन्हें डण्डेका उपयोग नहीं कर, घरमें बलपूर्वक घुसेडना न पडता, इस महामारीके विषयमें सावधान करने हेतु अनेक कोटि रुपएके विज्ञापन नहीं बनाने पडते । वे स्वयं रोगग्रस्त न हो जाएं, इस हेतु उनके समक्ष निवेदन नहीं करना पडता । आज समाजको समयके महत्त्वका संस्कार दिया गया तो वे इस समय मिलनेवाले एक-एक पलका सदुपयोग करते । इसलिए हिन्दू राष्ट्र चाहिए, जिससे चाहे कोई शिक्षित हो या अल्प शिक्षित उसका विवेक तो जाग्रत होगा । वह मनुष्य जीवनका महत्त्व समझेगा और समयका सदैव ही सदुपयोग करेगा; इसलिए हिन्दू राष्ट्रमें यह वसुन्धरा भोग भूमि नहीं साधना भूमि होगी । (८.४.२०२०) – (पू.) तनुजा ठाकुर


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