आश्रमका महत्त्व (भाग – १२)


वृत्तिको अन्तर्मुखी करनेहेतु एवं स्वयंमें साधकत्व निर्माण करनेहेतु आश्रममें कुछ दिवस रहना आवश्यक : घरमें एक समान्य गृहस्थ अपने मनानुसार आचरणकर, घरके अन्य सदस्योंको अपने वर्तनसे कष्ट देता है; किन्तु आश्रममें रहनेपर इस प्रकारकी चूकोंका भान कराया जाता है, जिससे दोष एवं अहंके लक्षणोंको दूर करनेहेतु सहायता मिलती है और वृत्ति अन्तर्मुखी होती है । ध्यान रखें ! आज समाज एवं घर, जो समाजकी सबसे लघु इकाई है, उसमें साधकत्वके अभावके कारण ही सबका जीवन कष्टप्रद है । एक साधक कभी किसीको कष्ट नहीं दे सकता है; अतः साधकत्व निर्माण करनेका एक महत्त्वपूर्ण स्थल आश्रम है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution