आश्रमका महत्त्व (भाग – ११)


आश्रममें रहनेसे चारों देहोंकी होती है शुद्धि : आश्रममें सन्तोंकी स्थूल एवं सूक्ष्म उपस्थितिके कारण वहांके चैतन्यसे वहां रहनेवाले साधक-जीवोंके चारों देहकी (स्थूल देह, मनोदेह (मन) कारणदेह (बुद्धि) एवं महाकारण देहकी (अहंकी) शुद्धि होती है । वर्तमान कालमें ८० प्रतिशत अच्छे साधकोंको अनिष्ट शक्तियोंके माध्यमसे तीव्र स्तरका अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है, ऐसेमें आश्रमके चैतन्यसे उनपर आध्यात्मिक उपचार अर्थात स्पिरिचुअल हीलिंग सहज ही होती है और उनके कष्ट स्वतः ही न्यून होने लगते हैं ।
यदि आश्रममें ९० प्रतिशतसे ऊपरके सन्तोंकी स्थूल या सूक्ष्म उपस्थिति हो तो वह एक तीर्थक्षेत्र समान ही होता है; अतः वहां स्थूल एवं सूक्ष्म दिव्यात्माओंका वास होता है, इससे आनेवाले व्यक्तियोंको बिना कुछ किए भी आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है ।



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