आश्रमका महत्त्व (भाग – १४)


‘प्रीति’, इस गुणको आत्मसात करनेका एक उत्तम स्थल है आश्रम : किसी भी सन्तके आश्रममें सभी भेदभाव भूलकर प्रेमसे कुटुम्ब भावनासे रहते हैं, ऐसेमें प्रीति, जो साधनाका एक महत्त्वपूर्ण चरण है, वह गुण सहज साध्य हो जाता है एवं धीरे-धीरे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’की अर्थात सम्पूर्ण विश्व ही मेरा घर है, यह भावना आत्मसात होने लगती है । आप सोचें ! आज यदि यह गुण समाजके प्रत्येक व्यक्तिमें समाविष्ट हो जाए तो यह वसुन्धरा कितनी सुन्दर हो जाएगी !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution