पत्थरबाजोंके विरुद्ध अभियोग वापस लेनेसे सुरक्षाबलोंको हानि होगी : केन्द्र


जून ५,२०१८

केन्द्रने मंगलवारको राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगसे कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकारद्वारा पत्थरबाजोंके विरुद्ध अभियोग वापस लेनेके निर्णयसे वहां तैनात सुरक्षाबलोंका मनोबल गिरेगा। इसके साथ ही केन्द्रने कहा कि इस निर्णयसे आतंकियोंको, आतंकी गतिविधियोंको करनेके लिए साधारण नागरिकोंको ढालकी तरह प्रयोग करनेका और साहस मिलेगा ।

सेनाके ३ जवानोंके बच्चोंद्वारा दी गई याचिकाके उत्तरमें, केन्द्रने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगको उत्तर दिया है। केन्द्रका कहना है यह राज्य सरकारका दायित्व है कि वह जम्मू- कश्मीरमें तैनात सेनाके जवानोंके मानवाधिकारोंकी रक्षाके लिए पत्थरबाजोंके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे ! बच्चोंद्वारा याचिकामें पूछा गया है कि सेनाके जवान जो मानवाधिकार हननका शिकार है, क्या उन्हें मानवाधिकारोंकी रक्षा करनेवालोंकी आवश्यकता नहीं है? इसके साथ ही उस याचिकामें बच्चोंने इस बातका भी वर्णन किया है कि भारतके नागरिक, युवा और एक सेनाके जवानके बच्चे होनेके नाते वह उन जवानोंको लेकर चिन्तित हैं, जिनकी तैनाती ऐसे अशान्त क्षेत्रो में की गई है ।

इस याचिकामें उस घटनाका भी वर्णन है, जब शोपियांमें सेनाके एक अधिकारीपर पत्थरबाजोंपर गोली चलानेके लिए एफआईआर की गई थी। रक्षा मन्त्रालयद्वारा विवरण फाइल करनेके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगने २ जूनको मुख्य सचिवका उत्तर भी ६ सप्ताहमें मांगा था। २ लेफ्टिनेंट कर्नलके और एक सेवानिवृत्त सूबेदारके बच्चोंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगके मुख्य न्यायधीश एचएल दत्तुके सामने ऐमनेस्टीके उस विवरणका सन्दर्भ भी दिया है, जिसमें जम्मू- कश्मीरके अशान्त क्षेत्रोंमें स्थानीय लोगोंके मानवाधिकारोंकी रक्षाकी बात की गई है; लेकिन याचिकाकर्ताओंका कहना है, इस विवरणने वहां तैनात सुरक्षाबलोंके मानवाधिकारोंकी रक्षासे मुख मोड लिया है, जिन्हें प्रतिदिन पत्थरबाजोंसे प्राणोंका भय रहता है।
याचिकाके अनुसार जम्मू-कश्मीरमें तब सेनाकी तैनाती की गई जब राज्य सरकार वहांकी कानून-व्यवस्थाको सम्भालनेमें असमर्थ हो गई; लेकिन वहांका प्रशासन जिससे सेनाको सहायताकी आशा रहती है, वह उनके मानवाधिकारोंकी रक्षा करनेमें असफल रहा ! बता दें कि जम्मू-कश्मीरकी मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने कश्मीरमें ४,३२७ पत्थरबाजोंपर लगाए गए अभियोगको वापस लेनेके आदेश दिए थे । इस निर्णयके पीछे इच्छा थी कि इससेे घाटीके युवाओंको उनके भविष्यके निर्माणके लिए एक नूतन अवसर मिल सकेगा, साथ ही घाटीके युवाओंके लिए एक ऐसे वातावरणका भी निर्माण हो सकेगा, जिसमें वे अपने जीवनको एक सकारात्मक दिशा दे सकें !

स्रोत : नवभारतटाइम्स



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