आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ८)


आंवलाको (अमृता, अमृतफल, आमलकी) सबसे महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक घटकके रूपमें कहा जा सकता है । यह भोजन और औषधि दोनों ही है ! यह छोटासा फल असंख्य स्वास्थ्य लाभोंसे भरा है । अमला शब्द ‘खट्टा’का उल्लेख करता है, जो कि इसका मुख्य स्वाद है । इसे प्रत्येक रोगकी औषधि भी कहा जाता है । यह पाचन तन्त्रसे लेकर स्मरण शक्तिको सशक्त करता है । यह एक बहुत ही शक्तिशाली ऑक्सीकरण रोधी (एंटीऑक्सीडेंट) फल है, जो कि मुक्त कणोंसे होने वाली ‘सेल ऑक्सीकरण’को रोकता है ।
घटक – आंवला ‘विटामिन-सी’में बहुत समृद्ध है, और इसमें कई खनिज और ‘कैल्शियम’, ‘फास्फोरस’, ‘आयरन’, ‘कैरोटीन’ और ‘विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स’ जैसे विटामिन सम्मिलित हैं ।
आइए आंवलाके लाभके विषयमें जानते हैं –
नेत्रोंके लिए – मधुके (शहदके) साथ आंवलेका रस पीना दृष्टिके लिए लाभकारी है । इसमें विद्यमान ‘विटामिन-ए’ रात्रि अंधापनको अल्प (कम) करता है और आपकी दृष्टिको सशक्त कर सकता है ।
मधुमेहके लिए – आंवला, कोशिकाओंके पृथक समूहको उत्तेजित करता है, जो अंतःस्राव (हार्मोन) इंसुलिनको छिपानेके साथ-साथ मधुमेह रोगियोंमें रक्त शर्कराको अल्प (कम) करते हैं और शरीरको सन्तुलित और स्वस्थ रखते हैं ।
पाचनके लिए – आंवलामें बहुत अधिक मात्रामें ‘फाइबर’ है, जो आंतोंके माध्यमसे भोजनको ले जानेमें सहायता करता है और आपके मल त्यागको नियमित रखता है । फाइबर ढीली मलको भी बढा सकता है और अतिसारको (दस्तको) कम कर सकता है ।
हृदयके लिए – यह हृदयकी मांसपेशियोंको भी सशक्त बनाता है और अतिरिक्त ‘कोलेस्ट्रॉल’को कम करता है । इसमें विद्यमान लोहा नूतन लाल रक्त-कोशिकाओंके निर्माणको बढाता है, रक्त वाहिकाओं और धमनियोंको स्वच्छ करते हुए नूतन रक्त कोशिकाओंके विकास और पुनर्जन्मको अधिकतम करनेके लिए परिसंचरण और अंगों और कोशिकाओंके ‘ऑक्सीजन’को बढाता है ।
बालोंके लिए – आंवला बालोंका विकास तीव्र गतिसे करता है । आंवला, रीठा, शिकाकाई तीनोंका काथ बनाकर सिर धोनेसे बाल घने और लम्बे होते हैं । ताजा आंवला खाने या बालोंकी जडोंपर लगाने से बाल घने होते हैं । आंवलेको काटकर नारियलतेलमें उबालकर लगानेसे बाल काले होते हैं ।
सेवन विधि – त्रिफलाकी ३ औषधियोंमेंसे आंवला एक है । इसे सूखे चूर्णके रूपमें अन्य औषधियोंके साथ नुस्खेके रूपमें और अचार, चटनी, मुरब्बेके रूपमें सेवन किया जाता है । एक साबुत आंवलाको दाल या शाक बनते समय डाल दीजिए तो यह दाल-शाक बननेके समय पक जाएगा । आंवलेको ठण्डा होनेपर इसमें शक्कर मिलाकर भोजनके साथ शाककी भांति खा सकते हैं । आंवलेको कच्चा भी खाया जा सकता है ।
सावधानियां – यद्यपि अध्ययनोंमें किसी प्रकारके कठोर, नकारात्मक प्रभावोंका विवरण नहीं है, तथापि आंवलेके उपयोगमें कुछ सावधानियां आवश्यक हैं –
१. यदि आपका ‘हाइपरएसिडिटी’ या ‘विटामिन-सी’ युक्त खाद्य पदार्थोंकी संवेदनशीलताका कोई भी इतिहास है, तो आपको इस फलको खानेसे बचना चाहिए ।
२. उच्च मात्रामें आंवलेका उपभोग मलको कठोर कर सकता है ।



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