कश्मीरके पूर्व मुख्यमन्त्री उमर अब्दुल्लाने पत्नीसे सम्बन्ध विच्छेद हेतु सर्वोच्च न्यायालयमें लगाई गुहार


२१ फरवरी, २०२१
    उमर अब्दुल्लाका सम्बन्ध विच्छेद प्रकरण देहलीके उच्च न्यायालयमें अटका हुआ है । अब्दुल्लाने सर्वोच्च न्यायालयमें इस हेतु पुनः याचिका प्रविष्ट कराई है । उमर अब्दुल्लाका विवाह १९९४ में सिख परिवारकी लडकी पायल नाथसे हुआ था ।  विवाहके पश्चात पायल नाथके स्थानपर पायल अब्दुल्ला कहलाने लगी । विवाहके १५ वर्ष पश्चात दोनों पृथक रहने लगे । देहली उच्च न्यायालयद्वारा सम्बन्ध विच्छेदकी सुनवाईपर मना करनेसे, अब्दुल्लाने सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट कराई । अब्दुल्लाके लिए कांग्रेस नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल अभियोगमें प्रस्तुत होंगे ।
   देहली उच्च न्यायालयने, पायलद्वारा ‘वीडियो’ वार्तालापमें सम्मिलित होनेसे मना करनेपर, अभियोगकी कार्यवाही रोक दी गई थी, इसी कारण अब्दुल्लाने इसके विरोधमें सर्वोच्च न्यायालयसे प्रार्थना की । सर्वोच्च न्यायालयने उसकी याचिकाको स्वीकार करते हुए कहा कि उचित समयपर ही सुनवाई की जा सकती है; क्योंकि कोरोना महामारीके मध्य न्यायालयमें सीमित कार्यके कारण, सुनवाई तीव्रतासे नहीं की जा सकती और पायल अब्दुल्लाने भी ‘वीडियो कांफ्रेंस’द्वारा प्रभावी कार्यवाहीके लिए अनुमति नहीं दी है ।
        एक हिन्दू लडकीका विवाह यदि हिन्दूसे होता तो वह जन्म-जन्मान्तरका बन्धन होता; किन्तु मुसलमान विवाहको मात्र एक ‘सन्धि’ मानते हैं और इसे तोडनेमें उन्हें कुछ भी असहज नहीं लगता; अतः हिन्दू लडकियां म्लेच्छोंसे दूर रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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