विवाहके १६ वर्ष पश्चात धर्मान्धद्वारा तीन तलाकके सूचना-पत्र (नोटिस) भेजनेके प्रकरणमें उसके विरुद्ध अभियोग (मुकदमा) प्रविष्ट किया गया


अक्तूबर १७, २०१८

देहरादूनमें तीन तलाकका सूचना-पत्र (नोटिस) भेजने वाले पतिके विरुद्घ न्यायालयके आदेशके पश्चात डोईवाला थानेमें अभियोग (मुकदमा) प्रविष्ट कर लिया गया है । पुलिसने ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम – २०१८’की धारा तीन व चार और मारपीट, गाली गलौच व दहेजके लिए प्रताडित करनेके आरोपमें अभियोग (मुकदमा) प्रविष्ट (दर्ज) किया है ।
मंगलवारको मुख्य न्यायिक न्यायाध्यक्ष (मजिस्ट्रेट) एमएम पांडेयके न्यायालयने तीन तलाक देने वाले पतिके विरुद्घ अभियोग प्रविष्ट करनेके आदेश दिए थे । जानकारीके अनुसार डोईवाला थाना क्षेत्रकी रहने वाली शगुफ्ताका विवाह देहरादून निवासी अमीरसे वर्ष २००२ में हुआ था । इसके पश्चात दोनोंमें अनबन रहने लगी थी । इस मध्य दम्पतिको दो सन्तानें भी हुईं, परन्तु गत जुलाईमें अमीरने एक सूचना-पत्र (नोटिस) भेजा, जिसमें उसने शगुफ्तापर कई आरोप लगाए और उसे तीन बार तलाक लिखकर सम्बन्ध विच्छेद कर लिया ! शगुफ्ताने पुलिससे परिवाद की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई थी ! इसके पश्चात उसने न्यायालयमें शरण ली थी ।

इसमें एसएसपी निवेदिता कुकरेतीका कहना है कि शगुफ्ताने पुलिसको परिवाद (शिकायत) की थी, लेकिन अभियोग क्यों प्रविष्ट नहीं हुआ, इसके कारणका अभिज्ञान किया जाएगा । उन्होंने बताया कि इस बातकी भी सम्भावना हैं कि जब शगुफ्ताने पुलिसको परिवाद की थी उस समय अधिनियम नहीं बना था ।

“कहां विवाहके १६ वर्ष पश्चात भी पत्नीको तलाक देकर भगानेकी आज्ञा देने वाले कट्टरवादी पन्थ और कहां एकपत्नीव्रतकी शिक्षा देने वाला सनातन धर्म !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : अमर उजाला



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