दिसम्बर २१, २०१८
पश्चिमी उत्तर प्रदेशके सैकडों मदरसोंने कहा है कि वे अपने छात्रोंको ‘मीजल्स-रूबेला’ टीका नहीं लगवाएंगें । उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभागने उनसे मदरसोंमें छात्रोंको टीका लगानेकी अनुमति मांगी थी; परन्तु उन्होंने अनुमति देनेको अस्वीकृत कर दिया !
मेरठमें २७२ मदरसे हैं । इन मदरसोंमेंसे ७० ने स्वास्थ्य विभागको अपने मदरसोंमें प्रवेश देनेसे मना कर दिया है । मेरठके टीकाकरण अधिकारी विश्वास चौधरीने बताया कि क्षेत्रमें व्हाट्सएप सन्देशकेद्वारा भ्रम प्रसारित किया गया था कि मीजल्स (खसरा) रूबेलाका टीकाकरण करवानेसे लडके नपुसंक हो जाएंगे । सन्देशमें लिखा था कि मुस्लिमोंको नपुसंक बनानेके लिए शासन उनके बच्चोंको टीका लगवा रही है ।
इसके अतिरिक्त देशके भिन्न-भिन्न क्षेत्रोंसे खबरें आईं कि टीकाकरणके पश्चात कई छात्र बीमार पड गए । लोगोंमें इस बातको लेकर भी भय हो गया । यद्यपि स्वास्थ्य विभागके अधिकारियोंका कहना है कि जो छात्र टीकाकरणके बाद बीमार पडे उसके पीछे कारण उन्हें टीका लगना नहीं बल्कि कुछ और था ।
बडी बात यह है कि कुछ मदरसोंमें तो छात्रोंसे कहा गया कि वे टीकाकरण वाले दिन अपने घरमें ही रहें । सहारनपुरके चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीएस सोढीने कहा, ‘हम लोग लोगोंमें निराधार बातोंपर ध्यान न देनेके लिए और टीकाकरण सम्बन्धित जो भी उनकी बाते हैं, उन्हें दूर करनेके लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं ।’
स्वास्थ्य विभागके अधिकारियोंने बताया कि ‘मीजल्स’ एक संक्रामक रोग है । यह खांसने और छींकनेसे भी फैलता है । शासकीय विवरणकी मानें तो २०१५ में ‘मीजल्स’से ४९,००० बच्चों मर गए !
इससे लडनेके लिए स्वास्थ्य विभागने मौलानाओंसे सहायता लेनेका निर्णय लिया है । मेरठके नगर काजी जैनुस राशुद्दीनने सभी मदरसोंसे कहा है कि वे अपने परिसरमें स्वास्थ्य विभागके दलको आने दे और उनकी टीकाकरणमें सहायता करें । उन्होंने कहा, ‘टीकाकरणके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं । इसकी जांच अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामियाके चिकित्सकोंने भी की है । उन्हें इसमें कोई समस्या नहीं मिली है ।’
इधर बिजनौरमें भी मदरसोंके टीकाकरणके मना करनेके पश्चात सीएमओ डॉ. राकेश मित्तलने प्रशासनसे परिवाद की । प्रशासनने सीएमओकी अध्यक्षतामें एक बैठक बुलाई । इस बैठकमें मुस्लिम धार्मिक संगठनोंके मुखियाओंके साथ वार्ता की गई और उन्होंने भी स्वास्थ्य विभागकी सहायता करनेका आश्वासन दिया ।
“तो क्या मौलवी अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया आदि इस्लामिक विश्वविद्यालयोंद्वारा स्वीकृत बातोंको ही अपनाएंगे !! इस गणितसे तो मौलवियोंको आधुनिक विज्ञानके सभी उपकरणोंका त्याग कर देना चाहिए और मौलवी छात्रोंके लिए भयभीत क्यों हैं ? क्योंकि आए दिन मदरसोंसे कुकर्म और राष्ट्रविरोधी गतिविधियोंके समाचार आते हैं तो ऐसेमें अपनी इस्लामिक शिक्षासे तो वे बालकोंको बुद्धिनपुंसक तो बना ही चूके होंगें, जिससे वह इस्लामसे ऊपर कुछ सोच ही न पाए तो एक टीका क्या करेगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply