सम्पूर्ण अहिंसक कोई नहीं हो सकता


इस ब्रह्माण्डमें किसी भी व्यक्तिद्वारा किसी भी स्थितिमें हिंसा न हो, यह सम्भव नहीं, यह नीचे लिखे शास्त्र वचनको पढनेसे स्पष्ट हो जाएगा; अतः जो सम्प्रदाय यह कहते हैं कि उनसे हिंसा नहीं होती है उनका यह तथ्य भ्रामक है !

देहान पुराणानउत्सृज्यनवानसंप्रतिपद्यते ।
एवं मृत्युमुखं पराहुर ये जनास कर्मफलर्दर्शिनः ।।

अर्थात ये चल एवं अचल ब्रह्माण्ड सभी प्रकारके प्राणियोंके लिए भोजन उपलब्ध कराता है, ये व्यवस्था श्रीहरिद्वारा विहितकी गई है । प्रतिदिन महान लोगोंद्वारा भी सूक्ष्म प्राणियोंका वध होता है; परन्तु इसका पाप उन्हें नहीं लगता, फलोंमें, जलमें, पूरी पृथ्वीपर असंख्य छोटे जीव होते हैं; अतः हम ये नहीं कह सकते कि उनका वध दिन-प्रतिदिन नहीं हो रहा है, ये परमात्माकी आज्ञा है, ये उन जीवोंका कर्मफल है, एक दृष्टिमें ये लग सकता है कि क्या योगियोंको उनके जीवनका समर्थन करना चाहिए ? वे प्राणी तो हमारी पलकोंके गिरनेके साथ ही अपने प्राण त्याग देते है; परन्तु जैसा मैंने कहा कि वे इस प्रकार अपना कर्म फल भोगते हैं । वस्तुत: यह चराचर जगत एक दूसरेपर आश्रित है ! इस प्रकार इस संसारमें कोई भी पूर्णत: अहिंसक नहीं होता, मात्र योगियोंसे कम हिंसा होती है; क्योंकि उसने इस दिशामें विशेष प्रयास होते हैं और वे सदैव सतर्क रहते हैं ।



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