जनवरी १४, २०१९
जम्मू कश्मीरमें प्लास्टिक गोलियोंके प्रयोगकी शासकीय योजनाके समाचारोंपर ओवैसीने सोमवार, १४ जनवरीको केन्द्र शासनपर ट्वीट किया, ‘‘यह इस शासनकी कश्मीर नीति है । घाटीमें पृथकतावादके पीछे अंर्तिनहित कारणोंकी खोज करनेके स्थानपर शासन नए शस्त्र, जो खोजनेका प्रयास कर रही है ।’’ हैदराबादसे लोकसभा सांसद उस सर्वदलीय शिष्टमण्डलका भाग रह चुके हैं, जिसने कश्मीरका भ्रमण किया था ।
वहीं, दूसरी ओर जम्मू कश्मीरके राज्यपाल सत्यपाल मलिकने आतंकवादियोंसे हिंसाकी राह छोडनेकी याचिका करते हुए सोमवारको कहा कि उनका प्रशासन उनके पुनर्वासके लिए जो भी हो सकेगा किया जाएगा । मलिकने एक कार्यक्रममें कहा, ‘‘’आपरेशन आल आउट’ जैसा यहां कुछ भी नहीं है । कुछ लोग इस शब्दका प्रयोग कर रहे हैं । हम चाहते हैं कि ये बच्चे (आतंकवादी) वापस लौटें और हम जो कुछ भी उनके लिए कर सकते हैं, करनेके लिए सज्ज हैं ।’’ वह कुछ राजनेताओंद्वारा ‘‘आपरेशन ऑल आउट’’ रोकने और कश्मीर घाटीमें हत्याकी जांचकी मांगमें पूछे गए प्रश्नका उत्तर दे रहे थे ।
मलिकने कहा, ‘‘जब कोई आतंकवादी कहीं भी गोली चलाता है और विस्फोटक फेंकता है तो ऐसा नहीं हो सकता है कि आप गोली चलाएं और हम आपको पुष्प और गुलदस्ता भेजें । हमारी ओरसे ‘आपरेशन आल आउट’ नहीं चलाया जा रहा है। उन्हें (आतंकवादियों को) यह राह छोड देनी चाहिए; क्योंकि इससे उन्हें कुछ नहीं मिलेगा ।’’ नेशनल कांफ्रेंसके अध्यक्ष फारूक अब्दुल्लाने कहा था कि प्रदेशमें यदि उनका शासन आता है तो वह राज्यमें हुई हत्याओंके लिए वह एक आयोगका गठन करेंगें, राज्यपालने कहा कि वह प्रतिदिन कुछ न कुछ कहते रहते हैं ।
राज्यपाल ने कहा, ‘‘वह एक वरिष्ठ राजनेता हैं; इसलिए उनके बारेमें टिप्पणी करना अच्छा नहीं है ।’’ मलिकने कहा कि मुख्यधाराके राजनेताओंकी राजनीतिक आवश्यकताएं हैं और ‘‘हमारे देशमें वोटके लिए लोग किसी सीमा तक जा सकते हैं ।’’
“वस्तुतः जहां शासकवर्गने आतंक समर्थित लोगोंको आतंकी मानकर कार्यवाही करनी चाहिए, वह नहीं हो रही है, तदोपरान्त ओवैसी प्लास्टिककी गोलियोंका आतंक समर्थित आगामी आतंकियोंके लिए विरोध कर रहे हैं, यह केवल उनकी राष्ट्रविरोधी व इस्लामपरस्त मानसिकताको ही प्रदर्शित करता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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