नामजप सकाम या निष्काम किसी भी उद्देश्यसे किया जाए, वह अवश्य ही फलदायी होता है, जैसे सकाम नामस्मरणसे इच्छित कार्य होता है या उस देवताकी कृपा होती है; परन्तु निष्काम नामस्मरणसे नामधारक ब्रह्म तत्त्व या ईश्वरसे एकरूप होता है एवं सर्वज्ञ तथा सर्वशक्तिमान परमेश्वर निष्काम भक्तका एक माता समान पालन पोषण एवं रक्षण करते हैं, तभी तो भगवान श्रीकृष्ण गीतामें कहते हैं –
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥
अर्थात, जो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए, मेरी भलीभांति उपासना करते हैं, मुझमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंके योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूं । इसप्रकार निष्काम भावसे अखण्ड नामजप कर ईश्वरीय कृपाका सम्पादन करें । भक्तवत्सल भगवान आपके लिए जो आवश्यक होगा, ऐसी सर्व इच्छाओंकी पूर्ति स्वयं करेंगे ! – तनुजा ठाकुर
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