दिसम्बर १६, २०१८
‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’का कहना है कि यदि केन्द्र शासन राम मंदिरपर अध्यादेश लाती है तो उच्चतम न्यायालय जाएंगे । यद्यपि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रकरण उच्चतम न्यायलयमें है, इसलिए शासन अध्यादेश नहीं ला सकती ।
रविवार, १६ दिसम्बरको लखनऊके नदवा महाविद्यालयमें मुस्लिमोंकी सर्वोच्च धार्मिक संस्था ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’की कार्यकारिणी सदस्योंकी बैठकमें यह निर्णय हुआ कि अयोध्यापर न्यायखलय जो भी निर्णय करेगा उसे माना जाएगा ।
समितिके संचालक मौलाना सैयद राबे हसनी नदवीकी अध्यक्षतामें दारुल उलूम नदवतुल उलूममें सम्पन्न हुई कार्यकारिणी बैठकमें राम मंदिरके लिए हिन्दू संगठनोंकी ओरसे भाजपा शासनसे अध्यादेश लानेकी निरन्तर हो रही मांगको राजनीति माना गया ।
“सभी प्रकरणपर निराधार फतवे जारी कर, उन्हें समर्थन देनेको बाध्य करने वाले धर्मान्ध शासनके अध्यादेशको माननेको मना कर रहे हैं ! यहीं धर्मान्ध जब प्रकरण इनके विरुद्ध हो तो उसे भाईचारेका चोला पहनाकर तथाकथित सद्भावना व गंगा-जमुना संस्कृतिकी बाते करते हैं । इससे इनका द्विपक्षीय, कट्टर इस्लामिक रवैया सबके समक्ष उजागर होता है और यह भी प्रमाणित करतख है कि भारत सदृश शान्तिप्रिय और यौगिक धरापर ऐसे उपद्रवियोंका कोई स्थान नहीं है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
Leave a Reply