शनिवारको खुलेंगे सबरीमाला मंदिरके कपाट, केरलकी धर्मद्रोही सरकारका महिलाओंके प्रवेशका अलग दिवस निर्धारित करनेका प्रस्ताव !


नवम्बर १५, २०१८

 

सबरीमाला मंदिरके कपाट १७ नवंबरसे दो माहके लिए खोल दिए जाएंगे । बता दें कि मंदिरमें प्रत्येक आयुकी महिलाओंको प्रवेश दिए जानेके न्यायालयके निर्णयका निरन्तर विरोध जारी है । इसी प्रकरणमें वार्ताके लिए केरलके मुख्यमंत्री पिनराई विजयनकी ओरसे बुलाई गई सर्वदलीय बैठकमें कोई परिणाम नहीं निकल पाया !

मुख्यमंत्रीने कहा कि राज्य शासन न्यायालयके इस निर्णयके विरुद्घ पग नहीं उठा सकती है । हम श्रद्धालुओंकी आस्थाका सम्मान करते हैं । हम न्यायाल्यके निर्णयको लागू करनेको लेकर बाध्य हैं । यह सर्वदलीय बैठक दो माह तक चलने वाले तीर्थाटनके लिए मंदिरके १७ नवम्बरको खुलनेसे पूर्व बुलाई गई थी । सूत्रोंके अनुसार, इस बैठकमें महिलाओंके मंदिरमें दर्शनके लिए भिन्न दिवस निर्धारित करनेका प्रस्ताव रखा गया ।

लगभग तीन घंटे चली बैठकको विपक्षने ‘स्वांग’ करार दिया । न्यायालयके आदेशको लागू करनेपर अडे रहनेपर कांग्रेसकी अध्यक्षता वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और भाजपाके प्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण वार्ताके अन्तमें उठकर चले गए । विधानसभामें नेता विपक्ष रमेश चेन्निथलाने कहा कि सरकार न्यायालयके आदेशको लागू करनेके अपने रुखपर अडिग है । वह किसी भी सन्धिके लिए तैयार नहीं है । विपक्षी दलोंने २२ जनवरी तक शीर्ष न्यायालयके आदेशके क्रियान्वयनको स्थगित करनेकी मांग की । इस आदेशके विरुद्घ दायर समीक्षा याचिकाओंपर उसी दिन सुनवाई होनी है ।

विपक्षकी मांग नकारते करते हुए मुख्यमंत्री पिनराईने कहा, “चूंकि शीर्ष न्यायालयने २८ सितंबरके अपने आदेशपर रोक नहीं लगाई है, ऐसेमें आगामी दर्शनमें सबरीमाला मंदिरमें महिलाओंको प्रवेशकी आज्ञा देनेके अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है । हम बाध्य हैं !”

उन्होंने आगे कहा कि सरकारने बिना किसी पूर्वाग्रहके यह बैठक बुलाई थी । सरकार अडियल नहीं है; लेकिन उसके पास शीर्ष न्यायालयके आदेशको लागू करनेके अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है । यदि कल न्यायालय कोई और निर्णय लेती है तो सरकार उसका पालन करेगी ।  वामपंथी नेताने कहा कि सरकार सभी श्रद्धालुओंको सुरक्षा प्रदान करेगी । सरकार बस न्यायालयके आदेशका पालन कर सकती है और सभी लोगोंको यह बात समझनी चाहिए ।


“मुख्यमन्त्रीने उचित ही कहा कि सरकार अडियल नहीं है । धर्मद्रोहिताको अडियलपना कहा भी नहीं जा सकता ! केरलमें होने वाले अन्धाधुन्ध धर्मान्तरणपर रोक नहीं लगाने वाले, केरलके युवाओंको ‘आइएस’में सम्मिलित  होनेसे न रोकने वाले, हिन्दू भक्तोंको पकडकर मारने व कारावासमें डालने वालेको अडियल कहेंगे क्या !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला

 



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