अमावस्या और पूर्णिमाके समय सूक्ष्म अनिष्ट शक्तियोंके कष्टसे पीडित साधकोंके कष्ट बढ जाते हैं; अतः ऐसे दिवसोंके दो दिवस पूर्व और पश्चात भी नामजप और प्रार्थना अधिक करनेका प्रयास करें । विशेषकर चन्द्रका हमारे मनपर अधिक प्रभाव पडता है; क्योंकि वह मनका अधिष्ठाता है । मनके विचार, चन्द्रमाकी स्थितिसे प्रभावित होते हैं; इसलिए जिन्हें मानसिक कष्ट होता है, उनके कष्ट पूर्णिमा और अमावस्याके समय बढ जाते हैं । यदि किसीमें स्वभावदोष या अहंका प्रमाण अधिक हो, तो अनिष्ट शक्तियां उन दोषोंका लाभ उठाकर साधकको कष्ट देती हैं । सामान्य साधकोंका भी मन ऐसे दिवसोंमें साधना करते समय एकाग्र नहीं हो पाता है, मनमें अनावश्यक विचार, नकारात्मक विचार, साधना या अपने आराध्यके प्रति विकल्पके विचार आने लगते हैं । अनेक घरोंमें, जहां कलह-क्लेश होता है, वहां ऐसे दिवसोंमें लडाई-झगडा बढ जाते हैं । जिन्हें क्रोध बहुत आता है, वे ऐसे दिवसोंमें अत्यधिक उग्र और आक्रामक हो जाते हैं । जिन्हें अवसाद आदिकी समस्या हो, उनकी स्थिति भी ऐसे दिवसोंपर बिगड जाती है; इसलिए यदि आपको भी ऐसे कष्ट होते हों तो अमावस्या या पूर्णिमाके दो दिवस पूर्व ही अपने भ्रमणभाषमें संकेतध्वनि (अलार्म) लगाकर साधना बढानेका प्रयास करें । आज अधिकांश अच्छे साधकोंको अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है; क्योंकि अनिष्ट शक्तियां नहीं चाहती हैं कि वे साधना करें । जिन्हें आध्यात्मिक कारणोंसे शारीरिक कष्ट होता है, उनके कष्ट भी इस मध्य बढ जाते हैं; इसलिए इन दिवसोंपर सतर्क होकर साधना करें । आज अमावस्या है । हिन्दू धर्ममें अमावस्या और पूर्णिमाके दिवस इसलिए भी विशिष्ट आध्यात्मिक अनुष्ठान करने हेतु बताया गया है ! क्या इतना सूक्ष्म विचार किसी और धर्म और पंथमें किया गया है ?
दो दिवस पश्चात अर्थात २१.१.१९ को पूर्णिमा है ।
पूर्णिमा प्रारम्भ : २०.१.१९ दोपहर २.१९ बजे
समाप्ति :२१.१.१९ दिनमें १०.४६ बजे
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