अमेरिकन गायिका मैरी मिलबेनका हिन्दू संस्कृति प्रेम, श्लोक पढकर दी भारतीयोंको नववर्षकी शुभकामनाएं


१३ अप्रैल, २०२१
      चैत्र नवरात्रका शुभारम्भ १३ अप्रैल २०२१ से होते ही हिन्दुओंका नववर्षका भी आरम्भ हो गया । सप्त सागर परे भी विदेशियोंके लिए भी सनातन संस्कृतिके प्रति प्रेम व उसके मूल्योंके प्रति अनुपालनमें व्यापक वृद्धि हो रही है । इसी अवसरपर अमेरिकन गायिका मैरी मिलबेनने भी भारतीय सभ्यताके साथ जुडते हुए संस्कृतमें श्लोक पढकर समस्त हिन्दू समुदायके प्रति कृतज्ञता व शुभकामनाएं व्यक्त की है ।
     अभिनेत्री मैरी मिलबेनने सन्देशका शुभारम्भ संस्कृत श्लोकके मन्त्रोच्चारणसे कर सभीको नववर्षके मंगलमय होनेकी कामना की । इससे पूर्व गत दीपावलीमें समस्त भारतीयों व विदेशमें निवासरत भारतीय समुदायको सम्बोधितकर “ऊँ जय जगदीश हरे”, मन्त्रोच्चारणकर शुभकामनाएं व्यक्त की । उन्होंने हिन्दुओंके पारम्परिक त्योहारोंके विषयमें तीव्र जिज्ञासा व्यक्त की । जैसे-जैसे भारतके विषयमें अभिज्ञानमें वृद्धि हो रही है, उनका इस देशके प्रति प्रेम भी घनिष्ठ हो रहा है । उन्होंने अपने हिन्दी शिक्षक डॉ. मोक्षराजका आभार व्यक्तकर  भारत और भारतीय समुदायके लिए प्रार्थना की है, जिससे समस्त भारतीय सुरक्षित रहे । उनके शिक्षक डॉ. मोक्षराजने कहा कि वह भारतीय संस्कृतिके विषयमें सब कुछ जाननेको उत्सुक रहती हैं । हिन्दीके माध्यमसे वह भारतीय संस्कृति और त्योहारोंको जानने हेतु सैदव तत्पर रहती हैं ।
  उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जब ‘पॉप सिंगर’ रिहाना और तथाकथित पर्यावरणीय कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ‘टूल किट’के लिए भारतमें चल रहे तथाकथित कृषक आन्दोलनपर विदेशी प्रपञ्चमें कार्यरत थीं । उस समय मिलबेनने भारतके प्रधानमन्त्री मोदीपर विश्वास व्यक्त किया था, जिसमें मैरीने कहा था, “आज, मैं अपने भारतीय भाइयों और बहनोंके साथ एकजुटता प्रदर्शित करती हूं । मुझे भारतमें नए सुधारोंके माध्यमसे भारतीय कृषकोंके जीवनको उत्तम बनाने हेतु माननीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके दृष्टिकोणपर पूर्ण विश्वास है । कृषि वैश्विक अर्थव्यवस्थाका एक अतिमहत्त्वपूर्ण अंग है । कृषक किसी भी देशके पारिस्थितिकी तन्त्रकी रीढ है । हमें सदैव उन लोगोंका ध्यान रखना चाहिए, जो भूमिमें कार्यरत हैं; अतः कृषक और जो भूमिकी सदैव रक्षा करते हैं, ‘सैन्य बल’ । अब शान्तिके राजदूतोंके ऊपर उठनेका समय है ।”
   विश्वके प्रत्येक राष्ट्रमें सनातन संस्कृति परायण व्यक्ति व जन समूहमें कोटिशः वृद्धि हो रही है, जो इस धराके प्रत्येक जीव व घटकोंके लिये सर्व मंगलकारी है । यही धर्मधाराका प्रवाह अब राजनीति, आर्थिक आदि सभी क्षेत्रोंमें हो, तब इस धरापर दिव्ययुग स्वतः ही स्थापित हो जाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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